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गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ की झांकी में दिखेगा देश का पहला आदिवासी डिजिटल म्यूजियम

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गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह झांकी भारत के पहले आदिवासी डिजिटल म्यूजियम पर आधारित है, जो आदिवासी वीर नेताओं के संघर्ष, समर्पण और बलिदान को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है।

‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्’ थीम पर आधारित झांकी

‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्’ थीम वाली यह झांकी गुरुवार को रक्षा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय मीडिया के सामने आरआर कैंप में आयोजित प्रेस पूर्वावलोकन के दौरान प्रदर्शित की गई। झांकी में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को आधुनिक डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है।

अमर आदिवासी नायकों को श्रद्धांजलि

छत्तीसगढ़ की यह झांकी उन अमर आदिवासी नायकों को श्रद्धांजलि देती है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण कानूनों का साहसपूर्वक विरोध किया और देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। झांकी आदिवासी समाज के शौर्य, स्वाभिमान और देशभक्ति को सशक्त रूप से सामने रखती है।

नवा रायपुर में स्थापित पहला आदिवासी डिजिटल म्यूजियम

इन शहीदों की स्मृति में नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला आदिवासी डिजिटल म्यूजियम स्थापित किया गया है। इस म्यूजियम में 14 प्रमुख आदिवासी स्वतंत्रता संघर्षों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से संरक्षित किया गया है। इस म्यूजियम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर किया था।

अंतिम रूप देने में जुटे कलाकार और अधिकारी

विशेषज्ञ समिति से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद सार्वजनिक संबंध विभाग के अधिकारी और कलाकार पिछले एक महीने से झांकी को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस वर्ष कुल 17 राज्य झांकियों को कर्तव्य पथ पर परेड में शामिल होने का गौरव प्राप्त हुआ है।

वीर गुंडाधुर और भूमकाल विद्रोह की झलक

झांकी में वर्ष 1910 के भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर को विशेष रूप से दर्शाया गया है। धरवा समुदाय के इस वीर योद्धा ने अन्याय के खिलाफ समाज को संगठित किया था। भूमकाल विद्रोह के प्रतीक आम की टहनियां और सूखी मिर्च भी झांकी में दिखाई गई हैं। विद्रोह की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों को नागपुर से सैनिक बुलाने पड़े, फिर भी वे वीर गुंडाधुर को पकड़ नहीं सके।

वीर नारायण सिंह की शौर्यगाथा

झांकी में छत्तीसगढ़ के पहले शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर तलवार हाथ में लिए दर्शाया गया है। उन्होंने अकाल के समय गरीबों के हितों के लिए संघर्ष किया और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह प्रस्तुति आदिवासी समुदाय के अडिग साहस, देशभक्ति और स्वतंत्रता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को प्रभावी ढंग से दर्शाती है। (इनपुट: आईएएनएस)

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