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मंगल कार्बन प्लांट हादसे में 9 माह की मासूम सहित चार की मौत, मुआवजे की मांग पर एनएच-49 जाम

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रायगढ़। खरसिया थाना क्षेत्र के ग्राम बानीपाथर स्थित मंगल कार्बन प्लांट में हुए दर्दनाक हादसे के बाद क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है। 5 फरवरी को हुए हादसे में गंभीर रूप से झुलसे श्रमिकों में से अब तक 9 माह की मासूम बच्ची सहित चार लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों का इलाज रायपुर के कालडा बर्न अस्पताल में चल रहा था, जहां एक-एक कर उनकी मौत की खबर सामने आई।

मृतकों में एक ही परिवार के तीन सदस्य शामिल हैं—9 माह की भूमि खड़िया, उसके पिता शिव खड़िया और दादा साहेब राम खड़िया। वहीं एक अन्य श्रमिक इंद्रवर की भी उपचार के दौरान मौत हो गई। लगातार हो रही मौतों से गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है।

शव रखकर एनएच-49 पर चक्काजाम

गुरुवार सुबह साहेब राम खड़िया का शव गांव पहुंचते ही परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। करीब सुबह 10 बजे एनएच-49 पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया गया। लगभग चार घंटे तक सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लगी रही और यातायात बाधित रहा। बड़ी संख्या में ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता मौके पर मौजूद रहे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि प्रत्येक मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी तथा पूरे परिवार को संरक्षण दिया जाए। उनका कहना था कि एक ही घर में तीन मौतों से परिवार पूरी तरह टूट गया है और छोटे बच्चों का भविष्य संकट में है।

विधायक पहुंचे, कार्रवाई की मांग

चक्काजाम की सूचना पर खरसिया विधायक उमेश पटेल मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और प्लांट प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तथा उचित मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं गंभीर लापरवाही का परिणाम हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।

प्रशासन की समझाइश के बाद जाम समाप्त

पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाइश दी। खरसिया एसडीओपी प्रभात पटेल के अनुसार, समझाइश के बाद दोपहर में जाम समाप्त हुआ। प्रशासन ने बताया कि मृतकों के परिजनों को करीब 10-10 लाख रुपये मुआवजा दिया जाना प्रस्तावित है।

तीन घायलों की हालत गंभीर

हादसे में घायल उदाशिनी खड़िया (25 वर्ष), कौशल (25 वर्ष) और प्रिया (32 वर्ष) का उपचार जारी है। उनकी स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।

लगातार हो रही मौतों और मुआवजे को लेकर असंतोष के बीच क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों की नजरें अब प्रशासनिक कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को मिलने वाली सहायता पर टिकी हैं।

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