सुरों की कोकिला लता मंगेशकर की मिस्ट्री फिल्म, जिसने जीते 5 नेशनल अवॉर्ड

भारतीय सिनेमा में अपनी अमर आवाज़ से पहचान बनाने वाली सुरों की कोकिला लता मंगेशकर ने सिर्फ गानों तक ही खुद को सीमित नहीं रखा। बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने एक मिस्ट्री-ड्रामा फिल्म भी प्रोड्यूस की थी, जिसने राष्ट्रीय पुरस्कारों में इतिहास रच दिया।
हम बात कर रहे हैं 1991 में रिलीज हुई फिल्म लेकिन… की। इस फिल्म का निर्देशन मशहूर गीतकार-निर्देशक गुलजार ने किया था। फिल्म की कहानी गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की 1895 की लघुकथा ‘क्षुद्रित पाषाण’ (The Hungry Stones) पर आधारित थी।
🎬 क्या है फिल्म की कहानी?
‘लेकिन…’ एक रहस्यमयी आत्मा की कहानी है, जो राजस्थान के एक प्राचीन महल में भटक रही है। वह मुक्ति चाहती है। महल में आने वाला एक व्यक्ति उसके अधूरे अतीत और पीड़ा को समझने की कोशिश करता है और उसे मोक्ष दिलाने का संकल्प लेता है।
फिल्म में विनोद खन्ना, डिंपल कपाड़िया, अमजद खान, आलोक नाथ और बीना बनर्जी ने अहम भूमिकाएं निभाईं। वहीं हेमा मालिनी का विशेष अभिनय भी देखने को मिला।
🏆 5 नेशनल अवॉर्ड जीतकर रचा इतिहास
फिल्म को रिलीज होने में करीब चार साल लगे, लेकिन रिलीज के बाद इसे समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और समय के साथ यह कल्ट क्लासिक बन गई।
38वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में फिल्म ने 5 पुरस्कार जीते, जिनमें—
- हृदयनाथ मंगेशकर को सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन
- लता मंगेशकर को सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका
- गुलजार को सर्वश्रेष्ठ गीतकार
शामिल थे।
फिल्म का संगीत आज भी याद किया जाता है। खासतौर पर लता मंगेशकर का गाया गीत यारा सीली सीली बेहद लोकप्रिय हुआ।
इसके अलावा 37वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में फिल्म को सर्वश्रेष्ठ गीतकार का पुरस्कार मिला, जबकि डिंपल कपाड़िया को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए नामांकन प्राप्त हुआ।





