छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध साहित्यकार का 23 को जन्मदिन: ‘अरपा नदिया’ के रचयिता को प्रदेशभर से मिल रहीं शुभकामनाएं

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छत्तीसगढ़ी और हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित रचनाकार डॉ. देवधर 23 अप्रैल को अपना 70वां जन्मदिवस मनाने जा रहे हैं। पिछले पांच दशकों से अधिक समय से साहित्य सृजन में सक्रिय हैं।
 जांजगीर-चांपा/बाराद्वार। छत्तीसगढ़ी और हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित रचनाकार डॉ. देवधर महंत 23 अप्रैल को अपना 70वां जन्मदिवस मनाने जा रहे हैं। इस खास अवसर को लेकर प्रदेशभर के साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और उनके प्रशंसकों में उत्साह का माहौल है और सभी ने उन्हें अग्रिम शुभकामनाएं दी हैं।

55 वर्षों की सतत साहित्य साधना
डॉ. महंत पिछले पांच दशकों से अधिक समय से साहित्य सृजन में सक्रिय हैं, और मां सरस्वती की साधना में लीन हैं। उनकी लेखनी की शुरुआत वर्ष 1970 में दैनिक ‘देशबंधु’ से हुई थी। कविता, कहानी, व्यंग्य, समीक्षा, संस्मरण और रिपोर्ताज जैसी विभिन्न विधाओं में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

‘अरपा नदिया’ से मिली राष्ट्रीय पहचान
उनकी प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी कृति ‘अरपा नदिया’ ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। इसका अंग्रेजी अनुवाद पद्मश्री अरुण कुमार शर्मा और उड़िया अनुवाद कृष्णकुमार अजनबी तथा हिंदी अनुवाद स्वयं कवि ने किया है। जो गिरीश पंकज द्वारा संपादित त्रैमासिक “सद्भावना दर्पण” में प्रकाशित हुई थी। इसके अलावा ‘बेलपान’, ‘पुन्नी के पांखी’, ‘रतनपुर धाम’ जैसी कृतियां भी काफी चर्चित रही हैं। उनकी रचना ‘अरपा नदिया’ पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के एम.ए. (छत्तीसगढ़ी) के पाठ्यक्रम में शामिल है।

हिंदी साहित्य में भी मजबूत पहचान
डॉ. महंत की हिंदी रचनाएं भी देश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं जैसे ‘धर्मयुग’, ‘हंस’ और ‘नवनीत’ छत्तीसगढ़ मित्र आदि में प्रकाशित हुई हैं। उनके कविता संग्रह “बिल्कुल नहीं बचे हैं दीए किसी देवी-देवता के लिए” और व्यंग्य संग्रह ‘कुत्तों की मानहानि’ को विशेष सराहना मिली है।

आकाशवाणी-दूरदर्शन से जन-जन तक पहुंची रचनाएं
साल 1974 से उनकी रचनाएं आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से उनकी छत्तीसगढ़ी व हिंदी कविताएं, कहानियां और वार्ताएं एवं चिंतन निरंतर प्रसारित होते रहे हैं। उन्होंने 1971 से काव्य मंचों पर अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई और देश के प्रतिष्ठित अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों में हिस्सा लिया।

डॉ. महंत ने छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य पर गहन शोध करते हुए ‘करमा लोकगीतों’ पर महत्वपूर्ण कार्य किया है। साथ ही ‘बेलपान’ जैसे सांस्कृतिक मंच के जरिए क्षेत्रीय कला और संस्कृति को बढ़ावा दिया। इस रचनाकार की कविताओं को ‘छत्तीसगढ़ी कविता के सौ साल’, ‘कविता छत्तीसगढ़’ और ‘छत्तीसगढ़ के सरस स्वर’ जैसे प्रतिनिधि संकलनों में प्रमुखता से स्थान मिला है।

प्रशासनिक सेवा से वकालत तक का सफर
34 वर्षों तक मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ शासन में राजस्व अधिकारी के रूप में सेवाएं देने के बाद वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में वकालत कर रहे हैं और जरूरतमंदों को न्याय दिलाने का कार्य कर रहे हैं।

साहित्यकारों ने दी शुभकामनाएं
डॉ. देवधर महंत के 70वें जन्मदिवस पर प्रदेशभर के साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की है, ताकि उनकी लेखनी से भविष्य में भी उत्कृष्ट साहित्य सृजन होता रहे।

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