मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया बुनकर शिल्पकार अरुण कुमार मेहर की पुस्तक ‘वरदान’ का विमोचन

रायगढ़/सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ के बुनकर समुदाय से जुड़े समर्पित शिल्पकार एवं लेखक अरुण कुमार मेहर की पुस्तक ‘वरदान : आपदा से अवसर तक, संघर्ष, सृजन और सफलता की गाथा’ का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विमोचन किया। ग्रामोद्योग विभाग द्वारा आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय बुनकर दिवस के अवसर पर यह विमोचन किया गया।
हथकरघा और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के बुनकरों, शिल्पकारों और ग्रामोद्योग से जुड़े कारीगरों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सहित विभागीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक हथकरघा, हस्तशिल्प और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
पारंपरिक हथकरघा कला से जुड़ा है अरुण मेहर का सफर
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सरिया तहसील से लगे ग्राम पंचधार निवासी अरुण कुमार मेहर राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित शिल्पकार एवं बुनकर हैं। वे पारंपरिक हथकरघा और उड़िया साड़ियों की बुनाई के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने जीवन के संघर्ष, अनुभव और सृजन की यात्रा को ‘वरदान’ पुस्तक के माध्यम से प्रस्तुत किया है।
युवाओं को पारंपरिक कला से जोड़ना उद्देश्य
अरुण कुमार मेहर ने बताया कि ‘वरदान’ पुस्तक समाज के लिए नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। उनका उद्देश्य अपनी संघर्ष यात्रा और अनुभवों को युवाओं तक पहुंचाना तथा उन्हें पारंपरिक कला, मेहनत और आत्मनिर्भरता से जोड़ना है।
पुस्तक की कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू और छत्तीसगढ़ शासन ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश सिंह राणा ने भी सराहना की है। पुस्तक का संपादन वरिष्ठ साहित्यकार, लेखक, संपादक एवं कवि त्रिलोचन पटेल ने किया है।
स्थानीय कला और बुनकर समुदाय की आवाज
छत्तीसगढ़ के बुनकरों और स्थानीय हस्तशिल्प को देश के प्रमुख एयरपोर्ट एवं बड़े मॉल तक पहुंचाने के प्रयासों के बीच ‘वरदान’ को बुनकर समुदाय के संघर्ष, कला और अनुभवों को सामने लाने वाली महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। पुस्तक विमोचन के दौरान साहित्यकार त्रिलोचन पटेल सहित उपस्थित लोगों ने इसकी विषयवस्तु और सामाजिक सरोकारों की सराहना की।








