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तमिलनाडु में शराब सिंडिकेट पर बड़ी कार्रवाई: 3600 करोड़ ‘पार्टी फंड’ वसूली का खुलासा, सीएम विजय ने सिस्टम बदलने के दिए सख्त आदेश

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तमिलनाडु में नई टीवीके सरकार ने सत्ता संभालते ही आबकारी व्यवस्था में बड़े पैमाने पर चल रहे कथित भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि शराब बिक्री से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा ‘पार्टी फंड’ के नाम पर बाहर जा रहा था, जिसका अनुमानित आंकड़ा करीब 3600 करोड़ रुपये तक पहुंचता है। इस खुलासे के बाद राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

शराब बिक्री में चल रहा था संगठित वसूली सिस्टम, हर बोतल पर तय रेट का खेल उजागर

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शराब की हर पेटी पर 90 रुपये, बीयर कार्टन पर 40 रुपये और वाइन कार्टन पर 20 रुपये तक की अवैध वसूली का सिस्टम लंबे समय से सक्रिय था। यह पूरा नेटवर्क थोक से लेकर खुदरा बिक्री तक फैला हुआ था, जिससे हर महीने करीब 102 करोड़ रुपये की अनियमित वसूली होने का अनुमान लगाया गया है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा कि अब शराब बिक्री से जुड़ा हर रुपया सीधे सरकारी खजाने में जाएगा और किसी भी प्रकार का अनऑफिशियल कलेक्शन सिस्टम पूरी तरह खत्म किया जाएगा।

कैबिनेट बैठक में सख्त फैसला, IAS स्तर पर नई जिम्मेदारी तय

5 जून को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री ने आबकारी विभाग को साफ संदेश दिया कि जनता के पैसे की लूट किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद पूरे सिस्टम की निगरानी के लिए प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव किए गए हैं और वरिष्ठ IAS अधिकारी को आबकारी आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सरकार का दावा है कि आदेश लागू होने के बाद अवैध वसूली का पूरा नेटवर्क बंद कर दिया गया है और जांच प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है।

717 शराब दुकानें बंद, कई संवेदनशील स्थानों पर चल रही थीं अवैध बिक्री

सरकार ने नियमों के उल्लंघन के चलते 717 शराब दुकानों को बंद करने का फैसला लिया है। इनमें स्कूल-कॉलेज, धार्मिक स्थलों और बस स्टैंड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के पास संचालित दुकानें भी शामिल हैं।

सबसे ज्यादा दुकानें मदुरै, कोयंबटूर, तिरुचि, चेन्नई और सलेम क्षेत्रों में बंद की गई हैं। हालांकि इस फैसले से राज्य को लगभग 8000 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान की संभावना भी जताई जा रही है।

नया सिस्टम लागू: उम्र सीमा 21 साल, बायोमेट्रिक जांच अनिवार्य

सरकार ने शराब बिक्री को नियंत्रित करने के लिए कई नए नियम लागू किए हैं। अब शराब खरीदने की न्यूनतम आयु 21 साल तय कर दी गई है। हर बिक्री के समय आईडी और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होगा।

इसके अलावा तय कीमत से अधिक वसूली या नाबालिगों को शराब बेचने पर सीधे सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।

सरकार का दावा: पारदर्शी सिस्टम और सख्त निगरानी से होगा सुधार

मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य में शराब बिक्री व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार मुक्त सिस्टम तैयार करना है। वहीं आबकारी मंत्री ने भी स्पष्ट किया है कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी तरह के निजीकरण की कोई योजना नहीं है।

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