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आरटीई फीस प्रतिपूर्ति बढ़ाने की तैयारी, 14 साल बाद बन रही नई समिति; निजी स्कूलों ने आंदोलन वापस लिया

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रायपुर। निजी स्कूलों में आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत पढ़ने वाले गरीब बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति राशि को पुनः निर्धारित करने के लिए अब राज्य सरकार ने समिति गठन की तैयारी शुरू कर दी है। स्कूल शिक्षा सचिव ने इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय को निर्देश जारी किए हैं।

14 साल बाद बदल सकती है प्रतिपूर्ति राशि

जानकारी के अनुसार, आरटीई के तहत निजी स्कूलों में पढ़ने वाले प्रति छात्र को वर्तमान में लगभग 7 हजार रुपये प्रतिपूर्ति राशि दी जाती है। यह राशि पिछले 14 वर्षों से यथावत है। अब इस राशि में बढ़ोतरी के लिए समिति गठन की प्रक्रिया शुरू की गई है, जो नए सिरे से दरों का निर्धारण करेगी।

कमेटी गठन के बाद आंदोलन वापस

प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को लेकर निजी स्कूल संचालक लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। समिति गठन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद निजी स्कूल संघ ने अपना असहयोग आंदोलन वापस ले लिया है।

आरटीई प्रवेश प्रक्रिया पर भी असर

निजी स्कूल संघ ने पहले आरटीई सीटों पर प्रवेश रोकने और असहयोग आंदोलन की घोषणा की थी। इसके चलते शैक्षणिक सत्र 2026-27 के पहले चरण में कई छात्रों को प्रवेश में कठिनाई का सामना करना पड़ा। हालांकि बाद में छात्रहित को देखते हुए स्कूलों ने प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी।

दूसरे चरण की दाखिला प्रक्रिया जारी

पहले चरण के प्रवेश पूर्ण होने के बाद अब आरटीई के दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

फैसले से जुड़े अहम सवाल

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि समिति द्वारा बढ़ाई गई प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान किस सत्र से लागू होगा। इस पर अंतिम निर्णय समिति की सिफारिशों के बाद सरकार द्वारा लिया जाएगा।

सरकार के इस कदम से उम्मीद जताई जा रही है कि निजी स्कूलों और शासन के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद समाप्त होगा और आरटीई प्रवेश प्रक्रिया अधिक सुचारु रूप से आगे बढ़ेगी।

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