रायगढ़ में खाद संकट गहराया, 15 समितियों में ढाई महीने से डीएपी का स्टॉक शून्य

खरीफ सीजन में किसानों की बढ़ी चिंता
रायगढ़। खरीफ सीजन के बीच रायगढ़ जिले में उर्वरकों की कमी किसानों के लिए बड़ी चिंता बन गई है। प्रशासन आपूर्ति को लेकर गंभीर जरूर है, लेकिन समय पर खाद नहीं पहुंचने से कई सहकारी समितियों में स्टॉक लगातार खाली पड़ा है। कहीं यूरिया उपलब्ध है तो डीएपी नहीं, कहीं एनपीके खत्म है तो कहीं एसएसपी का भंडारण ही नहीं हो पाया।
79 में से 15 समितियों में अप्रैल से डीएपी नहीं
जिले की 79 समितियों में से 15 ऐसी समितियां हैं जहां 1 अप्रैल 2026 से डीएपी का स्टॉक पूरी तरह शून्य बना हुआ है। इनमें लोइंग, कोड़तराई, कछार, पुसौर, पड़िगांव, बड़े हल्दी, गोर्रा, नवापारा मांड, छिछोर उमरिया, तिलगी, धरमजयगढ़ के खड़गांव और पोड़ीछाल, तमनार के खुरुसलेंगा व चितवाही तथा लैलूंगा के घटगांव शामिल हैं।
वैश्विक संकट का असर, समय पर नहीं पहुंचा उर्वरक
इस वर्ष वैश्विक स्तर पर युद्ध जैसे हालातों का असर भारत में उर्वरक आपूर्ति पर भी पड़ा है। समय पर पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं होने के कारण खरीफ सीजन में राज्यों के पास सीमित स्टॉक ही पहुंच पाया। किसानों की सबसे ज्यादा मांग यूरिया और डीएपी की बनी हुई है, लेकिन डीएपी की कमी सबसे अधिक महसूस की जा रही है।
घरघोड़ा गोदाम पर उठे सवाल
घरघोड़ा स्थित मार्कफेड खाद गोदाम एक बार फिर चर्चा में है। बताया जा रहा है कि तकनीकी गड़बड़ियों के कारण एसएसपी परिवहन के लिए आरओ जारी नहीं हो सका, जिससे लैलूंगा, तमनार और धरमजयगढ़ क्षेत्रों में खाद आपूर्ति प्रभावित हुई। इसी गोदाम में पहले गबन का मामला भी सामने आ चुका है।
नैनो यूरिया और नैनो डीएपी पर बढ़ी निर्भरता
उर्वरकों की कमी को देखते हुए अपेक्स बैंक ने IFFCO से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की अतिरिक्त आपूर्ति की मांग की है। जिले की 79 समितियों के लिए 492 पैकेट नैनो डीएपी और 125 पैकेट नैनो यूरिया भेजने का प्रस्ताव रखा गया है।
कई समितियों में स्टॉक फिर हुआ शून्य
रायगढ़ के भातपुर समिति में अप्रैल में डीएपी स्टॉक शून्य था। बाद में 45 टन आपूर्ति हुई, जो पूरी बिक चुकी है। कांटाहरदी में 25 टन डीएपी पहुंचा था, लेकिन वहां भी पूरा स्टॉक समाप्त हो गया। पुसौर, पड़िगांव और बड़े हल्दी में अप्रैल से अब तक डीएपी की एक भी नई खेप नहीं पहुंची।
दूरस्थ क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर
धरमजयगढ़ के खड़गांव और पोड़ीछाल, तथा तमनार के खुरुसलेंगा और चितवाही जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है। यहां ढाई महीनों में एक बोरी डीएपी तक नहीं पहुंची, जिससे किसानों की बोआई पर सीधा असर पड़ने लगा है।






