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बस्तर में 99% इलाका हुआ IED मुक्त, सुरक्षाबलों का अभियान जारी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल उन्मूलन के बाद अब सुरक्षाबलों की सबसे बड़ी चुनौती नक्सलियों द्वारा प्लांट किए गए प्रेशर और कमांड आईईडी (IED) को निष्क्रिय करना थी। इस चुनौती पर सुरक्षाबलों ने लगभग पूरी तरह काबू पा लिया है। बस्तर का करीब 99 फीसदी इलाका अब आईईडी मुक्त हो चुका है, जबकि शेष एक फीसदी क्षेत्र में घने जंगल, पहाड़ी और इंटर-स्टेट बॉर्डर वाले इलाके शामिल हैं।

बचे हुए इलाकों में छह माह तक सर्च अभियान

सुरक्षाबलों के अनुसार शेष संवेदनशील क्षेत्रों में अगले छह महीनों तक विशेष सर्च अभियान चलाया जाएगा। लक्ष्य यह है कि आईईडी के खतरे को पूरी तरह समाप्त कर नागरिकों और जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

5 महीनों में 278 IED बरामद

वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में बस्तर रेंज में सुरक्षाबलों ने 278 आईईडी बरामद किए हैं। इसी अवधि में केवल 9 विस्फोट की घटनाएं दर्ज हुईं। यह सुरक्षा बलों की रणनीति और सतर्कता का बड़ा परिणाम माना जा रहा है।

संयुक्त रणनीति से विफल हो रहीं माओवादी साजिशें

सुंदरराज पट्टलिंगम ने बताया कि बस्तर पुलिस Central Reserve Police Force समेत केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ मिलकर रोड ओपनिंग पार्टी (ROP), बम निरोधक दस्तों, तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर लगातार कार्रवाई कर रही है। इससे माओवादियों की हमले की क्षमता पर गंभीर असर पड़ा है।

मानसून में भी जारी रहेगा डी-माइनिंग अभियान

आईजी के मुताबिक बारिश के मौसम में भी डी-माइनिंग ऑपरेशन नहीं रुकेगा। मानसून के दौरान और उसके बाद भी सर्च जारी रहेगा ताकि कोई भी छिपा विस्फोटक उपकरण बच न पाए।

स्थानीय लोगों को मिल रहा सीधा लाभ

आईईडी मुक्त क्षेत्रों में अब सड़क निर्माण, संचार सुविधा, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है। जिन इलाकों में कभी बारूदी सुरंगों के कारण आवाजाही जोखिम भरी थी, वहां अब सामान्य जनजीवन लौट रहा है। सुरक्षाबलों की कार्रवाई से ग्रामीणों का विश्वास भी बढ़ा है और विकास कार्यों को नई गति मिली है।

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