
रायगढ़। संभावित बाढ़ आपदा से निपटने के लिए जिला प्रशासन की तैयारियों और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को परखने के उद्देश्य से पुसौर विकासखंड के महानदी तटवर्ती ग्राम चंघोरी में बाढ़ आपदा मॉक ड्रिल आयोजित की गई। अभ्यास के दौरान नदी में फंसे लोगों को मोटरबोट के जरिए सुरक्षित बाहर निकालने, डूबते व्यक्ति का रेस्क्यू करने, प्राथमिक उपचार देने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया का व्यवहारिक परीक्षण किया गया।
यह मॉक ड्रिल राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गृह मंत्रालय भारत सरकार, छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग तथा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण रायगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुई।
सूचना मिलते ही सक्रिय हुआ बचाव दल
मॉक ड्रिल के दौरान सुबह करीब 10 बजे सूचना दी गई कि महानदी का जलस्तर बढ़ने के कारण चंघोरी क्षेत्र में कुछ लोग नदी के बीच बने टापू पर फंस गए हैं। सूचना मिलते ही जिला स्तर की राहत एवं बचाव व्यवस्था सक्रिय की गई।
जिला आपदा राहत बल के प्रशिक्षित तैराक मोटरबोट के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे और नदी में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के बाद प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर उनकी चिकित्सकीय जांच और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की गई।
इसके अलावा नदी में डूब रहे व्यक्ति के बचाव की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया गया। इस दौरान प्रशिक्षित तैराकों, मोटरबोट, चिकित्सा दल और एंबुलेंस को एक साथ तैनात कर आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की क्षमता को परखा गया।
कई विभागों ने मिलकर किया बचाव अभ्यास
मॉक ड्रिल में नगर सेना के जिला आपदा राहत बल ने राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, विद्युत और खाद्य विभाग सहित विभिन्न विभागों के साथ समन्वय बनाकर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया।
बाढ़ की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों को खाली कराने, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता देने की प्रक्रिया का भी व्यवहारिक परीक्षण किया गया।
इस दौरान संयुक्त कलेक्टर पूजा बंसल, डिप्टी कलेक्टर धनराज मरकाम, जिला सेनानी बी. कुजूर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को दी गई जानकारी
मॉक ड्रिल के दौरान ग्रामवासियों और स्कूली बच्चों को बाढ़ के समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें नदी-नालों और जलमग्न क्षेत्रों से दूर रहने, प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने और आपात स्थिति में सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए जागरूक किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ के दौरान नदी किनारे या जलमग्न क्षेत्रों में लोगों के फंसने की स्थिति बन सकती है। ऐसे समय प्रशिक्षित बचाव दल, मोटरबोट, तैराक, पुलिस, स्वास्थ्य टीम और प्रशासनिक अमले के बीच तेज समन्वय बेहद जरूरी होता है।
टेबल टॉप एक्सरसाइज के बाद हुआ मैदानी परीक्षण
बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने के लिए 18 अगस्त को राज्य स्तरीय टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की गई थी। इसमें संभावित बाढ़ की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य, विभागों की जिम्मेदारियां, सूचना के त्वरित आदान-प्रदान, बचाव दल की तैनाती, चिकित्सा सहायता और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता को लेकर चर्चा की गई थी।
इसी तैयारी को आगे बढ़ाते हुए 20 अगस्त को ग्राम चंघोरी में मैदानी मॉक ड्रिल आयोजित कर व्यवस्थाओं का व्यवहारिक परीक्षण किया गया।
आपदा की सूचना पर नियंत्रण कक्ष से करें संपर्क
जिला प्रशासन ने मानसून के दौरान बाढ़, जलभराव, अतिवृष्टि, पेड़ गिरने या अन्य प्राकृतिक आपदा से संबंधित सूचना एवं सहायता के लिए जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबर 07762-223750 पर संपर्क करने की अपील की है।
प्रशासन ने लोगों से आपदा की स्थिति में संयम बनाए रखने, अफवाहों से बचने, प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और केवल अधिकृत सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।
आपदा से निपटने के लिए प्रशासन तैयार
एडीएम अपूर्व प्रियेश टोप्पो ने बताया कि शासन के निर्देशों के तहत ग्राम पंचायत चंघोरी में बाढ़ की स्थिति को लेकर मॉक अभ्यास किया गया। इसमें जिले की बाढ़ आपदा से संबंधित टास्क फोर्स और जिला स्तरीय अधिकारी शामिल हुए।
उन्होंने बताया कि अभ्यास के दौरान महानदी में बाढ़ के कारण टापू पर फंसे लोगों को जीवन रक्षक नौका के माध्यम से सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह के अभ्यास से वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने में मदद मिलेगी।






