पहले डिमांड, फिर निर्माण: हाउसिंग बोर्ड की नई नीति लागू, 60% बुकिंग के बाद ही लगेगा टेंडर

बिना मांग के आवासीय प्रोजेक्ट शुरू करने पर रोक, शुरुआती तीन महीनों में 30% बुकिंग होने पर भी आगे बढ़ सकेगा निर्माण
रायगढ़। छत्तीसगढ़ में हाउसिंग बोर्ड की आवासीय परियोजनाओं को लेकर सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। वित्त एवं आवास मंत्री ओपी चौधरी की पहल पर लागू की गई इस नीति का मुख्य उद्देश्य आवासीय परियोजनाओं को वास्तविक मांग से जोड़ना और लंबे समय से खाली पड़े मकानों की समस्या को कम करना है।
नई व्यवस्था के तहत अब हाउसिंग बोर्ड किसी स्थान पर केवल अनुमान के आधार पर बड़ी संख्या में मकानों का निर्माण शुरू नहीं करेगा। पहले संबंधित क्षेत्र में आवास की मांग और लोगों की बुकिंग को परखा जाएगा, इसके बाद ही निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
60 प्रतिशत बुकिंग के बाद ही टेंडर
नई नीति के अनुसार किसी हाउसिंग प्रोजेक्ट में 60 प्रतिशत बुकिंग पूरी होने के बाद ही टेंडर जारी किया जाएगा। वहीं, प्रोजेक्ट लॉन्च होने के शुरुआती तीन महीनों में यदि कम से कम 30 प्रतिशत बुकिंग हो जाती है, तो निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रावधान रखा गया है।
इस व्यवस्था के पीछे सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिस परियोजना का निर्माण किया जा रहा है, उसके लिए पहले से पर्याप्त खरीदारों की रुचि मौजूद हो।
पुरानी व्यवस्था में खाली पड़े मकानों की समस्या
हाउसिंग बोर्ड में लंबे समय से पहले मकान बनाने और बाद में खरीदार तलाशने की प्रक्रिया अपनाई जाती रही है। कई स्थानों पर आवास की वास्तविक मांग का पर्याप्त आकलन किए बिना परियोजनाएं शुरू कर दी गईं।
निर्माण पूरा होने के बाद अपेक्षित संख्या में खरीदार नहीं मिलने से कई मकान लंबे समय तक खाली रहे। रखरखाव के अभाव में समय के साथ ऐसे मकानों की स्थिति भी खराब होती गई। इससे एक ओर बोर्ड के संसाधनों पर दबाव पड़ा, वहीं दूसरी ओर परियोजनाओं की उपयोगिता को लेकर भी सवाल उठते रहे।
‘पहले डिमांड, फिर निर्माण’ होगा आधार
नई नीति का केंद्रीय विचार ‘पहले डिमांड, फिर निर्माण’ है। इसका मतलब है कि परियोजना शुरू करने से पहले यह जानने की कोशिश की जाएगी कि संबंधित क्षेत्र में कितने लोग वास्तव में आवास खरीदने के इच्छुक हैं।
बुकिंग के आंकड़ों के आधार पर परियोजना की व्यवहारिकता का आकलन किया जाएगा। इससे सरकारी धन और संसाधनों का इस्तेमाल उन परियोजनाओं में करने में मदद मिलेगी, जहां आवास की वास्तविक जरूरत मौजूद है।
अच्छी लोकेशन को भी मिलेगी प्राथमिकता
नई व्यवस्था में केवल बुकिंग को ही आधार नहीं माना जाएगा। आवासीय परियोजना के लिए स्थान का चयन भी महत्वपूर्ण होगा। स्कूल, अस्पताल, बाजार, परिवहन सुविधा और बेहतर कनेक्टिविटी जैसे आवश्यक संसाधनों वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देने पर जोर रहेगा।
सरकार का मानना है कि अच्छी लोकेशन से मकानों की बिक्री के साथ-साथ उनका वास्तविक उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सकता है। इससे लोगों को रहने के लिए सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
60% बुकिंग से पता चलेगी परियोजना की मांग
हाउसिंग बोर्ड की नई व्यवस्था में बुकिंग प्रतिशत को परियोजना की मांग का महत्वपूर्ण संकेतक माना जा रहा है। किसी प्रोजेक्ट में यदि 60 प्रतिशत आवास पहले ही बुक हो जाते हैं तो इससे संबंधित क्षेत्र में लोगों की रुचि और आवास की आवश्यकता का अंदाजा लगाया जा सकेगा।
इससे निर्माण शुरू करने से पहले परियोजना की व्यवहारिकता को लेकर अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
‘घर केवल मकान नहीं, परिवार की पूंजी है’
वित्त एवं आवास मंत्री ओपी चौधरी के मुताबिक घर खरीदना किसी भी परिवार के लिए जीवन का बड़ा आर्थिक निर्णय होता है। परिवार अपनी बचत और भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखकर घर खरीदता या बनाता है।
उन्होंने आवास को केवल ईंट-पत्थर की संरचना नहीं, बल्कि परिवार की लंबे समय की बचत और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा विषय बताया। इसी वजह से सरकार ऐसी आवासीय परियोजनाओं पर जोर दे रही है, जहां लोगों की वास्तविक जरूरत, मांग और भरोसा पहले से मौजूद हो।
नई नीति के जरिए हाउसिंग बोर्ड की परियोजनाओं को मांग आधारित बनाने और खाली पड़े मकानों की समस्या पर अंकुश लगाने की दिशा में कदम उठाया गया है।






