लंबी कतारों से मिली भारत को मुक्ति, UPI ने बदली जीवनशैली : वित्त मंत्री ओपी चौधरी

रायगढ़। 2014 में मोदी सरकार के आने से पहले राशन की दुकान से लेकर रेलवे टिकट खिड़की, बिजली बिल जमा करने से लेकर सब्जी मंडी तक लंबी कतारें आम बात थीं। आज डिजिटल भुगतान और UPI ने रोजमर्रा के लेन-देन को तेज, आसान और सुविधाजनक बना दिया है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए डिजिटल पेमेंट को Ease of Life का बड़ा उदाहरण बताया है।
UPI बना रोजमर्रा की आदत
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि डिजिटल पेमेंट ने आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाया है। खरीदारी से लेकर विभिन्न प्रकार के भुगतान तक UPI ने भुगतान की पूरी व्यवस्था को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि अब स्मार्टफोन और QR कोड के जरिए कुछ ही सेकंड में भुगतान पूरा हो जाता है।
24,162 करोड़ लेनदेन का आंकड़ा
चौधरी के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में UPI के जरिए 24,162 करोड़ लेनदेन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 314.23 लाख करोड़ रुपये रही। वित्त वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा 2,233 करोड़ लेनदेन का था। इस तरह कुछ वर्षों में UPI लेनदेन में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
जुलाई में भी बना नया रिकॉर्ड
वित्त मंत्री ने बताया कि जुलाई 2026 में UPI के जरिए 23.66 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि 29.88 लाख करोड़ रुपये रही। वहीं जून में 22.7 अरब लेनदेन के साथ 28.9 लाख करोड़ रुपये का कारोबार हुआ।
गांवों तक पहुंचा डिजिटल भुगतान
देश में PoS मशीनों की संख्या 115.3 लाख और QR कोड की संख्या 7,854 लाख तक पहुंचने का दावा करते हुए चौधरी ने कहा कि अब छोटे दुकानदार और ठेले वाले भी डिजिटल भुगतान की सुविधा से जुड़ चुके हैं। UPI यूजर्स की संख्या भी 55.49 करोड़ से अधिक पहुंच गई है।
किराना से पेट्रोल पंप तक QR से भुगतान
उन्होंने कहा कि पहले किराना दुकानों पर नकद भुगतान का चलन अधिक था, लेकिन अब केवल किराना कारोबार में ही जून महीने में 3.74 अरब UPI ट्रांजैक्शन हुए। फास्ट फूड, दवा की दुकान, पेट्रोल पंप और बिजली बिल जैसे रोजमर्रा के भुगतानों में भी QR स्कैन कर भुगतान आम हो गया है।
गरीब और छोटे कारोबारियों का सशक्तिकरण
ओपी चौधरी ने कहा कि UPI केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम भी है। टियर-2, टियर-3 शहरों और गांवों में डिजिटल भुगतान अब कभी-कभार इस्तेमाल होने वाला विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि यह लोगों की रोजमर्रा की आदत का हिस्सा बन चुका है।






