
गंभीर इंजरी के बावजूद नहीं मानी हार, कोच और परिवार के सहयोग से फिर थामा रैकेट; बिलासपुर लौटने पर जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत
बिलासपुर। जिंदगी में मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, यदि हौसले मजबूत हों तो चुनौतियों को भी अवसर में बदला जा सकता है। बिलासपुर के पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी अभिजीत सखुजा ने अपने संघर्ष और दृढ़ संकल्प से इसे साबित कर दिखाया है। गंभीर इंजरी के कारण छह महीने तक बेड रेस्ट पर रहने के बाद उन्होंने शानदार वापसी की और एशियन पैरा गेम्स में बैडमिंटन का कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। उनकी इस उपलब्धि से बिलासपुर में खुशी और गर्व का माहौल है। शहर लौटने पर उनका जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया।
इंजरी के बाद लगा था, शायद अब नहीं खेल पाऊंगा
अभिजीत सखुजा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह उपलब्धि हासिल करना आसान नहीं था। गंभीर चोट के कारण उन्हें छह महीने तक बिस्तर पर आराम करना पड़ा। इस दौरान एक ऐसा दौर भी आया, जब उन्हें लगने लगा था कि शायद अब वह दोबारा बैडमिंटन नहीं खेल पाएंगे। खेल से दूर रहने की मजबूरी और वापसी की अनिश्चितता उनके लिए बड़ी चुनौती थी।
इसके बावजूद अभिजीत ने हार मानने के बजाय दोबारा मैदान पर लौटने का संकल्प लिया। उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में भी अपना हौसला बनाए रखा और खेल में वापसी की उम्मीद नहीं छोड़ी।
कोच और परिवार ने बढ़ाया हौसला
अभिजीत की इस संघर्षपूर्ण यात्रा में उनके कोच गुरदीप, प्रताप और परिवार का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। लगातार प्रोत्साहन और साथ मिलने से उन्हें मुश्किल दौर से उबरने की ताकत मिली। धीरे-धीरे उन्होंने अभ्यास दोबारा शुरू किया और अपनी फिटनेस तथा खेल पर मेहनत करते हुए प्रतिस्पर्धा में वापसी की।
उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने एशियन पैरा गेम्स में कांस्य पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह उपलब्धि उनके व्यक्तिगत संघर्ष के साथ-साथ उन्हें सहयोग देने वाले परिवार और प्रशिक्षकों के समर्पण को भी दर्शाती है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी संघर्ष की कहानी
अभिजीत सखुजा की सफलता बताती है कि कठिन परिस्थितियां किसी खिलाड़ी के सपनों का अंत नहीं होतीं। चोट के कारण लंबे समय तक खेल से दूर रहने के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतना उनके धैर्य, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचायक है।
बिलासपुर में उनके स्वागत और उपलब्धि को लेकर उत्साह है। अभिजीत की यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो जीवन या खेल के क्षेत्र में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उनका सफर संदेश देता है कि असफलता और बाधाओं के बीच भी यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण बना रहे, तो दोबारा उठकर आगे बढ़ने का रास्ता निकाला जा सकता है।






