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स्वास्थ्य प्रबंधन : मानसून में आपदा और मौसमी बीमारियों से निपटने चिकित्सा अधिकारियों को दिया प्रशिक्षण

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राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

रायगढ़। राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत चिकित्सा अधिकारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला में वर्षा ऋतु के दौरान उत्पन्न होने वाली आपदाओं एवं मौसमी बीमारियों से बचाव, रोकथाम और प्रभावी स्वास्थ्य प्रबंधन को लेकर चिकित्सा अधिकारियों को आवश्यक जानकारी एवं प्रशिक्षण दिया गया।

बाढ़ के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता पर जोर

कार्यशाला में मानसून के दौरान बाढ़ की स्थिति में उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विशेष चर्चा की गई। बाढ़ के बाद दूषित पानी एवं भोजन के सेवन से होने वाली बीमारियों, संक्रमण के फैलाव तथा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर बनाए रखने के उपायों की जानकारी दी गई।

इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, साफ-सफाई, व्यक्तिगत स्वच्छता और संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक सावधानियों के बारे में भी चिकित्सा अधिकारियों को बताया गया।

सर्पदंश और आकाशीय बिजली से बचाव की जानकारी

वर्षा ऋतु में सर्पदंश की बढ़ती आशंका को देखते हुए चिकित्सा अधिकारियों को इसके बचाव एवं रोकथाम के उपाय बताए गए। सर्पदंश की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेने, झाड़-फूंक या किसी भी घरेलू उपचार से बचने तथा पीड़ित को समय पर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने के लिए लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया गया।

इसी तरह आकाशीय बिजली और गर्जना के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की भी जानकारी दी गई। खराब मौसम में खुले स्थानों, पेड़ों के नीचे तथा बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचने और सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई।

डायरिया, पीलिया, मलेरिया और डेंगू की रोकथाम पर जोर

कार्यशाला में वर्षा ऋतु में अधिक सामने आने वाली डायरिया, उल्टी-दस्त, पीलिया, हेपेटाइटिस, मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार पर विस्तार से चर्चा की गई।

चिकित्सा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में मौसमी बीमारियों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने तथा संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान कर जांच और उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

स्वच्छ पानी और साफ-सफाई के लिए जागरूकता

जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए लोगों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल का उपयोग करने, भोजन को ढककर रखने, हाथों की नियमित सफाई करने और आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूक करने पर बल दिया गया।

मलेरिया एवं डेंगू की रोकथाम के लिए मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने, घरों एवं आसपास पानी जमा नहीं होने देने तथा बुखार आने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने के लिए लोगों को प्रेरित करने की बात कही गई।

आपदा के समय त्वरित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य

कार्यशाला का उद्देश्य वर्षा ऋतु में संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति चिकित्सा अधिकारियों को तैयार करना तथा जिले में आपदा एवं मौसमी बीमारियों की स्थिति में त्वरित और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना रहा।

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