छत्तीसगढ़

बिलासपुर में धर्मांतरण के बढ़ते मामलों पर बवाल, प्रार्थना सभा में लालच देकर धर्म बदलवाने का आरोप

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CG Bliaspur Conversion Case: छत्तीसगढ़ का बिलासपुर एक बार फिर धर्मांतरण के आरोपों को लेकर चर्चा में है। बिलासपुर के सीपत थान इलाके में आयोजित एक प्रार्थना सभा में लोगों को कतिथ टूर पर लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने के आरोप लगा है।

फिलहाल पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन लोगों पर FIR दर्ज कर ली है। स्थानीयों का आरोप है की सभा में मुफ़्त इलाज, शादी और आर्थिक मदद का लालह देकर लोगों को धर्म बदलने के लिए उकसाया जा रहा था। मामले में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। लगातार सामने आ रहे मामलों के कारण अब बिलासपुर धर्मांतरण का हाटस्पॉट कहा जाने लगा है।

16 महीनों में 58 मामले, प्रशासन भी सतर्क

जानकारी के अनुसार पिछले 16 महीनों में बिलासपुर जिले में धर्मांतरण से जुड़े 58 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा प्रशासन और पुलिस दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है। स्थानीय संगठनों का आरोप है कि गांवों और ग्रामीण इलाकों में प्रार्थना सभाओं और चंगाई कार्यक्रमों के जरिए लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

वहीं पुलिस का कहना है कि हर शिकायत की जांच तथ्यों के आधार पर की जा रही है। लगातार बढ़ते मामलों के बाद जिला प्रशासन ने भी संवेदनशील इलाकों पर नजर बढ़ा दी है। धर्मांतरण का मुद्दा अब सामाजिक और राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन चुका है।

चंगाई सभा में देवी-देवताओं पर टिप्पणी का आरोप

सीपत थाना क्षेत्र में दर्ज FIR में यह भी आरोप लगाया गया है कि सभा के दौरान हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले बयान दिए गए और लोगों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की गई कि प्रार्थना सभा में शामिल होने से बीमारी और परेशानियां दूर हो जाएंगी।

इसी आधार पर लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया गया। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मौके की जानकारी जुटाई और संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस गवाहों के बयान भी दर्ज कर रही है।

ग्रामीण इलाकों में बढ़ रही चिंता और सामाजिक तनाव

लगातार सामने आ रहे धर्मांतरण मामलों से ग्रामीण इलाकों में तनाव और असमंजस की स्थिति बन रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को निशाना बनाकर उन्हें लालच देने की कोशिश की जाती है।

वहीं कुछ सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े लोग यह भी कह रहे हैं कि किसी भी कार्रवाई से पहले निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि किसी निर्दोष को परेशानी न हो। बिलासपुर में धर्मांतरण को लेकर बढ़ती घटनाएं अब प्रशासन के लिए कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन दोनों की चुनौती बनती जा रही हैं।

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम क्या कहता है?

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति को लालच, दबाव, धोखे या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराना अपराध माना गया है। ऐसे मामलों में पुलिस जांच के बाद कानूनी कार्रवाई कर सकती है। राज्य में पिछले कुछ वर्षों से धर्मांतरण को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हुई है।

बिलासपुर में लगातार दर्ज हो रहे मामलों ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल सीपत मामले में पुलिस जांच जारी है और प्रशासन की नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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