रायगढ़ में ओम श्री रूपेश प्लांट पर बड़ा खुलासा: शासकीय भूमि पर अतिक्रमण, बुलडोजर से ढही बाउंड्रीवॉल

रायगढ़। रायगढ़ के चिरईपानी (Chiraipani) स्थित ओम श्री रूपेश प्लांट (Om Shri Rupesh Plant) पर शासकीय भूमि पर अतिक्रमण का गंभीर मामला सामने आया है। प्रशासनिक जांच में प्लांट संचालक को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का दोषी पाया गया, जिसके बाद शुक्रवार को तहसील प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई करते हुए अवैध बाउंड्रीवॉल को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान जिला पंचायत सदस्य गोपाल अग्रवाल भी मौके पर मौजूद रहे।
गर्भवती महिला की मौत के बाद तेज हुई जांच
यह मामला 18 जून को हुई दर्दनाक घटना के बाद चर्चा में आया। तेज आंधी-तूफान और बारिश के दौरान प्लांट की विशाल बाउंड्रीवॉल अचानक भरभराकर गिर गई। दीवार की चपेट में कंपनी के लेबर क्वार्टर में सो रहे मजदूर आ गए। इस हादसे में एक गर्भवती महिला दीवार के नीचे दब गई, जिससे उसकी और उसके अजन्मे शिशु की मौत हो गई। घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि बाउंड्रीवॉल कमजोर संरचना पर खड़ी थी और अत्यधिक दबाव के कारण ढह गई।
सीमांकन में सामने आया अतिक्रमण का पूरा मामला
जांच और सीमांकन के दौरान पता चला कि प्लांट संचालक ने शासकीय भूमि (government land), रास्ते और निस्तारी क्षेत्र तक को घेरकर बाउंड्रीवॉल बना दी थी। तहसीलदार शिवकुमार डनसेना के नेतृत्व में 20 जून को हुए सीमांकन में कई गंभीर तथ्य सामने आए।
रिकॉर्ड के अनुसार, खनं 38 (रकबा 1.465 हे.) की सड़क भूमि पर लगभग 2 फीट चौड़ी नाली निर्माणाधीन पाई गई, जहां गंदे पानी की निकासी भी की जा रही थी। वहीं खनं 104/1 और 104/2 पर क्रशर संचालन और स्लैग चूरा भंडारण मिला, जिससे दीवार पर अतिरिक्त दबाव बनने की आशंका जताई गई।
इसके अलावा खनं 44 (0.5830 हे.), खनं 32 (1.040 हे.) और खनं 41 (0.996 हे.) सहित कई शासकीय भूखंडों के हिस्से को घेरकर अहाता बना लिया गया था। प्रशासन के अनुसार, कुल मिलाकर विभिन्न सरकारी भूमि के हिस्सों पर अवैध कब्जा पाया गया।
निजी भूमि पर भी बड़े पैमाने पर निर्माण
जांच में यह भी सामने आया कि प्लांट परिसर से लगी कई निजी जमीनों पर भी बाउंड्रीवॉल का निर्माण किया गया है। इनमें खनं 46, 59/1, 31/1 और 33 शामिल हैं, जहां अलग-अलग रकबे पर निर्माण दर्ज किया गया।
दस्तावेजों के अनुसार, आसपास की प्रमुख जमीनें शंकरलाल अग्रवाल, गोपाल अग्रवाल, दयानंद अग्रवाल, रॉबिन अग्रवाल और धनेश्वरी के नाम दर्ज हैं।
कितनी जमीन है प्लांट संचालकों के पास?
मिली जानकारी के अनुसार, शासकीय भूमि के रूप में खनं 44 और 38 दर्ज हैं, जिनका उपयोग पहले रास्ते के रूप में होता था। अतिक्रमण मुख्य रूप से खनं 44 पर पाया गया।
प्लांट से सटी निजी भूमि में प्रमुख रूप से:
- खनं 45 — 0.1700 हे.
- खनं 43 — 0.9910 हे.
- खनं 37/1/क — 0.5140 हे.
- खनं 104/1 — 0.3190 हे.
- खनं 104/2 — 0.2310 हे.
- खनं 42 — 0.9910 हे.
- खनं 37/2 — 1.4160 हे.
बताई जा रही हैं। इनमें से कुछ भूमि ओम श्री रूपेश स्टील प्रा. लि. के नाम दर्ज है।
प्रशासन की कार्रवाई से बढ़ा सख्ती का संदेश
शुक्रवार को प्रशासन द्वारा बुलडोजर कार्रवाई के बाद यह साफ संदेश गया है कि अतिक्रमण (atikraman) और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सख्त कार्रवाई होगी। महिला की मौत के बाद यह मामला अब सिर्फ अतिक्रमण नहीं, बल्कि सुरक्षा और जवाबदेही का भी बड़ा सवाल बन गया है।







