छत्तीसगढ़ के 75 हजार शिक्षकों पर TET का दबाव, 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा पास करना जरूरी

75 हजार शिक्षक अब तक TET से बाहर
रायपुर। सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता ने छत्तीसगढ़ के करीब 75 हजार प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षकों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। बताया जा रहा है कि इन शिक्षकों ने अब तक TET उत्तीर्ण नहीं की है।
सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई समय-सीमा
पहले शिक्षकों को 31 अगस्त 2027 तक TET पास करने की समय-सीमा दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने एक और अवसर देते हुए अब यह समय-सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी है। तय अवधि में TET पास नहीं करने पर शिक्षकों की पदोन्नति के साथ नौकरी पर भी असर पड़ने की बात सामने आई है।
सामान्य TET ही पास करनी होगी
शिक्षक संगठनों की ओर से विशेष विभागीय परीक्षा आयोजित करने की मांग की गई थी, लेकिन राज्य सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया है। शासन का रुख है कि संबंधित शिक्षकों को सामान्य TET परीक्षा ही उत्तीर्ण करनी होगी।
साल में दो बार परीक्षा कराने का दबाव
31 अगस्त 2028 तक बड़ी संख्या में शिक्षकों को परीक्षा पास करने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) पर साल में कम से कम दो बार TET आयोजित करने का दबाव बढ़ गया है। इससे शिक्षकों को परीक्षा की तैयारी के लिए अधिक अवसर मिलने की उम्मीद है।
TET क्यों जरूरी है?
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के संदर्भ में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शिक्षकों की न्यूनतम पात्रता पर जोर दिया है। TET को शिक्षकों के शिक्षण कौशल और न्यूनतम पात्रता मानक सुनिश्चित करने की व्यवस्था के तौर पर देखा जाता है।
वरिष्ठ शिक्षकों ने मांगी छूट
विभिन्न शिक्षक संगठनों ने वरिष्ठता और लंबे सेवाकाल के आधार पर छूट देने की मांग उठाई है। वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों का तर्क है कि उनकी नियुक्ति के समय TET अनिवार्य नहीं थी। ऐसे में 15 से 20 साल से सेवा दे रहे शिक्षकों को TET से छूट देने की मांग की जा रही है।








