750 रुपए में बेची जा रही यूरिया की बोरी, संयुक्त टीम की कार्रवाई में दुकान सील

रायगढ़। जिले में धान की फसल के लिए खाद की किल्लत का फायदा उठाकर व्यापारी किसानों से मनमानी वसूली कर रहे हैं। बुधवार को राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने कापू में कार्रवाई करते हुए एक खाद दुकान की जांच की। जांच में यह खुलासा हुआ कि किसानों को यूरिया की बोरी 750 रुपए में बेची जा रही है, जबकि इसकी निर्धारित कीमत मात्र 266 रुपए है। इस गंभीर गड़बड़ी और रिकॉर्ड न मिलने के कारण समुद्री कृषि सेवा केंद्र को सील कर दिया गया।
किसान मजबूर, व्यापारी मुनाफाखोर
धान के सीजन में खाद की भारी मांग है, लेकिन समितियों में स्टॉक खत्म होते ही व्यापारी मौके का फायदा उठाने लगे। पहले तो उन्होंने अपने पास जमा कोटे को रोक दिया, फिर धीरे-धीरे ऊंचे दामों पर बेचना शुरू किया। स्थिति यह हो गई कि यूरिया और डीएपी के लिए किसान किसी भी कीमत पर खरीदने को मजबूर हैं।
छापा और खुलासा
कलेक्टर के आदेश पर कार्रवाई के दौरान धरमजयगढ़ नायब तहसीलदार उज्जवल पांडेय, एडीओ रामकुमार पटेल और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी गौरव महेश टीम के साथ पहुंचे। सूचना थी कि समुद्री कृषि सेवा केंद्र में अधिक दाम पर खाद बेची जा रही है और संदेहास्पद ढंग से ट्रक से यूरिया खाली किया जा रहा है।
स्थल निरीक्षण में पाया गया कि ट्रक (नंबर BR 02 GA 8002) से 580 बोरी नीम कोटेड यूरिया खाली हो रहा था। मौके पर मौजूद किसानों ने टीम को बताया कि 750 रुपए प्रति बोरी कीमत वसूली जा रही है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि बेची गई खाद की एंट्री पीओएस मशीन और आधार नंबर से नहीं की गई थी।
दुकान सील, खाद जब्त
टीम ने मौके पर ही कार्रवाई करते हुए समुद्री कृषि सेवा केंद्र को सील कर दिया और खाद विक्रय पर तत्काल रोक लगा दी। इस दौरान 1,54,570 रुपए कीमत का यूरिया जब्त किया गया।
ट्रक पर सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यूरिया से भरे ट्रक का है। जानकारी के अनुसार जिस रैक से यूरिया आया था, उसमें से केवल सहकारी समितियों को ही खाद आवंटित किया गया था। पत्थलगांव में मार्कफेड के डबल लॉक सेंटर को भी ट्रक में यूरिया भेजा गया था, लेकिन समुद्री कृषि सेवा केंद्र को कोई आवंटन नहीं हुआ था। ऐसे में सवाल उठता है कि कापू में यह ट्रक कैसे खाली हो रहा था?
सूत्रों के अनुसार, मार्कफेड गोदाम प्रभारी ने यह यूरिया एक प्राइवेट व्यापारी को बेच दिया था, और वही माल कापू में उतारा जा रहा था।
कई सवाल बाकी
- जब कंपनी खाद देती है तो पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है, फिर कापू में मिले खाद का स्रोत क्यों छिपाया जा रहा है?
- ट्रक की सप्लाई चेन का खुलासा क्यों नहीं किया गया?
- मार्कफेड और संबंधित गोदाम प्रभारी की भूमिका क्या है?






