हाईकोर्ट के सख्त निर्देश के बीच रायगढ़ में धान खरीदी पर सवाल, जमीन पंजीयन में गड़बड़ी का मामला

रायगढ़। एक ओर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने किसान हित में सख्त रुख अपनाते हुए सक्ती जिला प्रशासन को 30 दिनों के भीतर किसान का शेष 84 क्विंटल धान खरीदने का निर्देश दिया है, वहीं दूसरी ओर रायगढ़ जिले से धान खरीदी व्यवस्था में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है।
धरमजयगढ़ के दुर्गापुर केंद्र में गड़बड़ी
धरमजयगढ़ तहसील के दुर्गापुर उपार्जन केंद्र में दस्तावेज सत्यापन के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार ग्राम उदउदा के किसान महेंद्र यादव और रामचरण यादव के नाम पर एकीकृत किसान पोर्टल में कुल 36.0250 हेक्टेयर भूमि का पंजीयन दर्ज किया गया, जबकि वास्तविक सत्यापन मात्र 3.0250 हेक्टेयर भूमि का ही पाया गया।
दूसरे किसानों की जमीन पर पंजीयन!
मामले को और गंभीर बनाता है कि पंजीयन में शामिल कुछ खसरा नंबर अन्य व्यक्तियों के नाम पर दर्ज हैं—
- खसरा नंबर 452-4: राजू (मझवार) के नाम
- खसरा नंबर 927-10: तिलासो अमरसाय मझवार के नाम
इसके बावजूद इन जमीनों से भी महेंद्र यादव और रामचरण यादव के नाम पर धान विक्रय किया गया।
मिलीभगत की आशंका
यह सवाल उठ रहा है कि आखिर दूसरे भू-स्वामियों की जमीन को अपने नाम पर दिखाकर पंजीयन कैसे हुआ। इसे महज तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि सुनियोजित गड़बड़ी माना जा रहा है, जिसमें जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने धान खरीदी प्रणाली की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर न्यायालय किसान हित में सक्रिय है, वहीं जमीनी स्तर पर ऐसी अनियमितताएं पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रही हैं।






