खरसिया में ROB निर्माण को लेकर सियासी संग्राम, वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, विपक्ष ने बताया झूठा दावा

रायगढ़/खरसिया। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के खरसिया में रेलवे अंडर ब्रिज (ROB) का निर्माण होना है। इसके लिए तकनीकी सर्वे की प्रक्रिया शुरू की जानी है, लेकिन निर्माण से पहले ही इसे लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। एक तरफ वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कांग्रेस पर तीखे वार किए, तो दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने पलटवार करते हुए भाजपा पर श्रेय लेने का आरोप लगाया।
शुक्रवार को खरसिया के मंच से वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और डिप्टी सीएम अरुण साव की मौजूदगी में कहा कि आजादी के बाद से खरसिया में कांग्रेस का ही नेतृत्व रहा, लेकिन 75 साल का समय भी कांग्रेस को ROB बनाने के लिए कम पड़ गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पिछली 5 साल की सरकार भी इस काम को आगे नहीं बढ़ा पाई।
ओपी चौधरी ने विपक्ष के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष दावा करता है कि ROB परियोजना का एस्टीमेट, डीपीआर, टीएस और सर्वे कांग्रेस सरकार ने कराया था। लेकिन हकीकत यह है कि 5 साल में न तो एक ईंट रखी गई और न ही एक रुपया खर्च किया गया। उन्होंने कहा कि नगर पालिका चुनाव में भाजपा ने ROB निर्माण का वादा किया था और जनता ने भाजपा को जिताया। अब भाजपा की सरकार बनते ही काम शुरू होने जा रहा है। चौधरी ने कहा कि आने वाले दिनों में ROB का काम तेजी से आगे बढ़ेगा और भाजपा खरसिया की जनता के विकास कार्यों के लिए हमेशा खड़ी रहेगी।
कांग्रेस का पलटवार
खरसिया कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखदेव डनसेना, नेत्रानंद पटेल और अभय मोहंती ने संयुक्त बयान जारी कर वित्त मंत्री ओपी चौधरी के बयान को पूरी तरह असत्य और भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि ROB परियोजना कांग्रेस शासनकाल में ही स्वीकृत हुई थी और तत्कालीन मंत्री उमेश पटेल के कार्यकाल में सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थीं।
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि प्रशासनिक स्वीकृति आदेश, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा वितरण, स्थल निरीक्षण, डिजाइनिंग और टेंडर जैसी सभी प्रक्रियाएं कांग्रेस सरकार के दौरान ही संपन्न हो चुकी थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सारी तैयारी कांग्रेस शासनकाल में पूरी हो गई थी, तो भाजपा किस आधार पर ROB निर्माण का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है।
खरसिया में ROB निर्माण से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी तकरार तेज़ हो गई है। अब जनता की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि काम कब ज़मीनी स्तर पर शुरू होता है।












