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रायगढ़ में बायो मेडिकल वेस्ट के निराकरण में लापरवाही, खुले में फेंका जा रहा अस्पतालों का खतरनाक कचरा

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रायगढ़ । जिले में बायो मेडिकल वेस्ट के वैज्ञानिक निराकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग अब भी लापरवाही बरत रहा है। पूंजीपथरा में करीब पाँच करोड़ की लागत से बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन जिले के अधिकांश अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों ने अब तक अधिकृत एजेंसी से एग्रीमेंट नहीं किया है। नतीजतन खतरनाक स्तर का मेडिकल वेस्ट खुले में डंप किया जा रहा है, जिससे प्रदूषण और संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने छत्तीसगढ़ सरकार को आदेश दिया था कि बायो मेडिकल वेस्ट का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा किया जाए। डीप बरियल पद्धति से इसका निराकरण प्रतिबंधित कर दिया गया है। आदेश के मुताबिक सभी जिलों में बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए गए हैं और अस्पतालों को अनिवार्य रूप से अधिकृत एजेंसी को ही वेस्ट सौंपना है।

दरें कम होने के बाद भी एग्रीमेंट अधूरा
रायगढ़ में वीएम टेक्नोसॉफ्ट को बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की अनुमति दी गई थी। पूंजीपथरा में एक एकड़ जमीन पर यह प्लांट तैयार किया गया है। प्रतिदिन प्रति बेड 20 रुपए की दर से भुगतान तय किया गया था। हालांकि मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल ने इस दर को स्वीकार नहीं किया। बिलासपुर कमिश्नर की बैठक में रायगढ़ शहर के अस्पतालों के लिए यह दर घटाकर 10 रुपए कर दी गई, जिसके बाद शहर के अस्पतालों ने एग्रीमेंट कर लिया।

लेकिन खरसिया, धरमजयगढ़, घरघोड़ा, किरोड़ीमल नगर, तमनार, पुसौर और लैलूंगा क्षेत्र के अस्पतालों ने अब तक एग्रीमेंट नहीं किया है। यहां के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी मेडिकल वेस्ट का निस्तारण खुले में ही कर रहे हैं।

प्लांट पर भारी खर्च, फिर भी लापरवाही
पूंजीपथरा में बने प्लांट पर लगभग 4 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है और हर महीने करीब 15 लाख रुपए का खर्च आता है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों को इससे जोड़ने की जिम्मेदारी गंभीरता से नहीं निभाई है।

पर्यावरण विभाग भी मौन
नियमों के अनुसार रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को अधिकृत एजेंसी से ही मेडिकल वेस्ट का निपटारा करना अनिवार्य है। लेकिन तीनों जिलों के सीएमएचओ अस्पतालों से एग्रीमेंट नहीं करा पाए हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पर्यावरण विभाग की ओर से भी अब तक एक बार भी जांच नहीं की गई।

जिले में खुले में फेंका जा रहा बायो मेडिकल वेस्ट स्वास्थ्य और पर्यावरण, दोनों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसके परिणाम बेहद घातक हो सकते हैं।

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