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अभियंता दिवस विशेष : इंजीनियरिंग ने मुझे अनुशासित होना सिखाया – विनोद कुमार मिंज

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रायगढ़। देशभर में हर साल 15 सितंबर को अभियंता दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती पर मनाया जाता है, जिन्होंने अपने अद्वितीय कौशल और दृष्टिकोण से राष्ट्र के औद्योगिक और तकनीकी विकास को नई दिशा दी। अभियंता केवल मशीनों और संरचनाओं के निर्माता ही नहीं, बल्कि समाज की प्रगति के आधार स्तंभ हैं। पुल, सड़क, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवाएँ और अंतरिक्ष अनुसंधान हर क्षेत्र में उनकी मेहनत और रचनात्मकता झलकती है।

भारत ने पिछले वर्षों में औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और हरित ऊर्जा जैसी पहलों ने इंजीनियरों को बेहतर गुणवत्ता के उत्पादन और नवीन समाधान प्रस्तुत करने का अवसर दिया है। आज भारत वैश्विक स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उभरती हुई शक्ति के रूप में देखा जा रहा है। अभियंता दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि अभियंताओं की दूरदृष्टि और परिश्रम ही आधुनिक भारत के निर्माण की सच्ची नींव है।

“इंजीनियरिंग ने मुझे अनुशासित होना सिखाया”

इस विशेष अवसर पर रायगढ़ अंचल के इंजीनियरों से बातचीत में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यपालन अभियंता विनोद कुमार मिंज ने कहा –
“इंजीनियरिंग ने मुझे अनुशासित होना सिखाया है। अपनी पढ़ाई के बूते आज मैं यहां तक पहुंचा हूं। वर्तमान में मैं मैनेजेरियल पद पर हूं, पर इसे निर्वाह करने की बेसिक ट्रेनिंग तो सालों पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई ने दी है। अलग-अलग विचार और क्षमता के लोगों के साथ कैसे कार्य करना है, यह मैंने पढ़ाई के दौरान सीखा। डाउनलाइन को साथ लेकर अपलाइन की मदद से मैं कार्य करता हूं।”

विनोद मिंज का सफर

विनोद मिंज जितने सरल और सहज स्वभाव के हैं, उतने ही अपने कार्य के प्रति गंभीर भी। 50 वर्षीय मिंज कुनकुरी के रहने वाले हैं। उन्होंने वहीं से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000 में शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय, बिलासपुर से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उसी वर्ष शुरू हुई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में बतौर कंसल्टेंट जुड़े और गांवों को मुख्य सड़क से जोड़ने के कार्य में अब तक निरंतर सेवा दे रहे हैं।

अभियंता दिवस का संदेश

अभियंता दिवस केवल एक स्मरण मात्र नहीं है, बल्कि यह हमें यह भी सिखाता है कि समाज की प्रगति के लिए तकनीक और अनुशासन का कितना महत्व है। इंजीनियरों की मेहनत और दूरदृष्टि ही भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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