लोन दिलाने के नाम पर ड्राइवर के खाते से सायबर धोखाधड़ी, सुरक्षा गार्ड के खिलाफ मामला दर्ज

रायगढ़। ड्राइवर को लोन दिलाने का झांसा देकर उसके नाम से म्यूल अकाउंट खुलवाकर धोखाधड़ी करने का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में सायबर सेल ने जांच कर आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। जांच उपरांत पुलिस ने खाता खुलवाने में सहयोग करने वाले सुरक्षा गार्ड के विरुद्ध जुर्म दर्ज कर आगे की कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। यह पूरा सायबर क्राइम जूटमिल थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
मिली जानकारी के अनुसार, समन्वय पोर्टल के माध्यम से भारतीय सायबर अपराध समन्वय केन्द्र को रायगढ़ स्थित कर्नाटका बैंक में खुले एक म्यूल अकाउंट से हरियाणा, महाराष्ट्र और वेस्ट बंगाल में 1,03,305 रुपए की सायबर धोखाधड़ी की जानकारी मिली। इस सूचना पर सायबर सेल रायगढ़ द्वारा की गई जांच में उक्त खाते में 91,373 रुपए जमा होना पाया गया। साथ ही यह भी सामने आया कि खाते में सायबर धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि का उपयोग खाताधारक द्वारा किया गया है। इस पर पुलिस ने खाते में जमा राशि को होल्ड कर दिया।
बैंक से जानकारी लेने पर खाता धारक की पहचान जूटमिल थानांतर्गत ग्राम कुंजेडबरी निवासी पिताम्बर दास महंत पिता कमल दास महंत के रूप में हुई। पुलिस ने पिताम्बर को सायबर सेल बुलाकर पूछताछ की। पूछताछ में पिताम्बर ने बताया कि लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व वह सीएमएस कंपनी में ड्राइवर के रूप में कार्यरत था। उसी समय उसी कंपनी में सुरक्षा गार्ड का कार्य करने वाला हेमंत मालाकार से उसकी पहचान हुई थी।
पिताम्बर ने आगे बताया कि पैसों की जरूरत होने पर उसने हेमंत से बैंक लोन की चर्चा की थी। इस पर हेमंत ने उसे कहा कि लोन मिल जाएगा, लेकिन इसके लिए नए खाते की जरूरत पड़ेगी। पिताम्बर को पैसों की सख्त जरूरत थी, इसलिए वह हेमंत की बातों में आ गया और अपने नाम से कर्नाटका बैंक में नया खाता खुलवाकर पासबुक व एटीएम कार्ड हेमंत को दे दिया। हालांकि, खाता खुलवाने के बावजूद उसे आज तक कोई लोन नहीं मिला। खाते में जितने भी लेन-देन हुए, वे सभी हेमंत मालाकार द्वारा किए गए।
पिताम्बर ने बताया कि सायबर सेल से फोन आने पर जब उसे बुलवाया गया, तब उसे पता चला कि उसके नाम से खुले खाते का उपयोग सायबर धोखाधड़ी में किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने हेमंत मालाकार के विरुद्ध बीएनएस की धारा 317(2), 317(4), 317(5), 318(3), 318(4), 111 के तहत अपराध दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।












