Uncategorised

विजयपुर में सरकारी जमीन पर भूमाफियाओं का कब्ज़ा

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

स्कूल के लिए आरक्षित तीन एकड़ भूमि भी बिक गई, राजस्व विभाग की नाकामी उजागर

विजयपुर। शासन ने बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए सड़क किनारे करीब तीन एकड़ जमीन स्कूल निर्माण के लिए आरक्षित की थी। लेकिन भूमाफियाओं ने इस बेशकीमती भूमि पर भी कब्ज़ा कर उसे बेच डाला। वर्तमान में यहां एक एकड़ जमीन भी सुरक्षित नहीं बची है। यही नहीं, सामने दर्ज छोटे झाड़ के जंगल वाली भूमि पर भी अतिक्रमण हो चुका है।

राजस्व विभाग की नाकामी

विजयपुर में राजस्व विभाग की नाकामी और बेबसी साफ नज़र आ रही है। सरकारी आवंटन भूमि को बचाने में विभाग असफल साबित हुआ है। भूमाफियाओं का गठजोड़ इतना मजबूत है कि सरकारी रोड किनारे की जमीनें तक सुरक्षित नहीं रह पाईं।

इस पूरे खेल में नेताओं, जनप्रतिनिधियों, राजस्व कर्मचारियों और बाहुबलियों की मिलीभगत सामने आ रही है। गिरोह का मकसद सरकारी जमीनों को टुकड़ों में बेचकर मोटा मुनाफा कमाना है।

आरक्षित भूमि पर मकान-दुकान

स्कूल के लिए आरक्षित भूमि खसरा नंबर 8, रकबा 1.214 हे. की है। यह भूमि पूर्व में स्कूल हेतु दर्ज थी और राजस्व अभिलेखों में भी इसका उल्लेख है। लेकिन वास्तविकता यह है कि स्कूल तो कभी बना नहीं, उल्टे लोगों ने इस पर मकान और दुकानें खड़ी कर दीं।

दो गलियों में दर्जनों मकान बन चुके हैं और शेष भूमि पर भी कब्ज़ा कर लिया गया है। पानी टंकी के आसपास की पूरी जमीन पर अतिक्रमण हो चुका है। लोगों को यह सरकारी जमीन आसानी से बेच दी गई और अब यहां एक इंच भी भूमि शेष नहीं बची है।

गिरोह की कार्यशैली

भूमाफियाओं का गिरोह सबसे पहले पटवारी से सांठगांठ करता है और शासकीय भूमि की रजिस्ट्री करवा देता है। इसके बाद जल्द ही नामांतरण भी करा लिया जाता है। कई बार तहसीलदार तक को जानकारी नहीं होती कि जिस जमीन का नामांतरण किया जा रहा है, वह सरकारी आवंटन भूमि है।

इसी तरह गिरोह सरकारी जमीन पर प्लॉट काटकर उसे बेच देता है और कब्ज़ा करवा देता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र की लगभग सभी आवंटन जमीनें अतिक्रमण की चपेट में आ चुकी हैं।

निरस्त नामांतरण और पार्षद का नाम

खनं 4/6 की सात टुकड़ों में की गई रजिस्ट्री का नामांतरण निरस्त किया जा चुका है। इसमें एक टुकड़ा पूर्व पार्षद और वर्तमान पार्षद पति पदुम लाल परजा ने भी खरीदा था। उसने खनं 4/26 रकबा 0.0190 हे. खरीदा था।

खनं 4/1 रकबा 2.051 हे. भूमि भी शासकीय है और इसे छोटे झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज किया गया है। लेकिन यह भूमि अब नजर नहीं आती क्योंकि सड़क किनारे से अंदर तक पूरा क्षेत्र अतिक्रमण की चपेट में है। अभी भी यहां एक साथ चार दुकानों का निर्माण कार्य जारी है।

प्रशासन की इच्छाशक्ति पर सवाल

लोगों का कहना है कि प्रशासन सब कुछ जानता है, लेकिन इच्छाशक्ति के अभाव में कठोर कार्रवाई नहीं करता। इसी का फायदा उठाकर भूमाफियाओं ने विजयपुर की सरकारी जमीनों को टुकड़ों में बेचकर कब्ज़ा कर लिया है।

Advertisement
Advertisement

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button