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3000 करोड़ से ज्यादा बकाया बना वजह : नए साल से बदल सकता है सरकारी बिजली उपभोग सिस्टम

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छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों के बिजली उपभोग का तरीका नए साल से पूरी तरह बदल सकता है। प्रदेश सरकार सरकारी कार्यालयों में लगे स्मार्ट मीटरों को अब पोस्टपेड से प्रीपेड करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसका सीधा कारण है- लगातार बढ़ता बिजली बिल बकाया, जो अब तीन हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी का इंतजार है, जिसके बाद बजट में इसके लिए विशेष प्रावधान करना होगा।

स्मार्ट मीटर लगे, अब प्रीपेड की बारी

प्रदेशभर में सरकारी विभागों में पुराने मीटरों को हटाकर स्मार्ट मीटर (CG Prepaid Smart Meter) लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। करीब 1.72 लाख सरकारी कनेक्शनों में से सवा लाख से ज्यादा में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। शेष मीटर मुख्य रूप से पंचायतों और आंगनबाड़ी केंद्रों में लगाए जा रहे हैं। अभी ये सभी कनेक्शन पोस्टपेड हैं, लेकिन जल्द ही इन्हें प्रीपेड सिस्टम में बदलने की योजना है, ताकि बकाया बढ़ने से रोका जा सके।

आरडीएसएस योजना पर मंडरा रहा खतरा

सरकारी विभागों पर बढ़ते बिजली बकाये का असर केवल राज्य तक सीमित नहीं है। केंद्र सरकार की आरडीएसएस (रीवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम) जैसी योजनाओं में सहायता के लिए यह शर्त है कि राज्य पर बिजली कंपनियों का कोई बकाया न हो।

ऐसे में यदि समय रहते स्थिति नहीं संभाली गई, तो केंद्र से मिलने वाली करोड़ों की मदद पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि सरकार बकाया नियंत्रण को लेकर गंभीर नजर आ रही है।

कैसे बढ़ा तीन हजार करोड़ तक बकाया

आंकड़े बताते हैं कि अगस्त 2024 में सरकारी विभागों पर बिजली बकाया करीब 1988 करोड़ रुपये था, जो मार्च 2025 तक बढ़कर 2444.91 करोड़ हो गया। अब यह आंकड़ा तीन हजार करोड़ रुपये को पार कर चुका है। सबसे ज्यादा बकाया नगरीय निकायों पर है, जहां यह 1900 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पर 600 करोड़ से ज्यादा का बकाया है, जबकि अन्य विभागों पर भी करोड़ों की देनदारी बनी हुई है।

बजट में करना होगा अलग प्रावधान

पॉवर कंपनी लंबे समय से सरकारी विभागों के बकाये को लेकर चिंता जता रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रीपेड सिस्टम लागू करने से पहले पुराने बकाये का भुगतान जरूरी होगा। इसके साथ ही हर विभाग को नियमित रिचार्ज के लिए अलग से बजट देना पड़ेगा। माना जा रहा है कि यदि आगामी बजट सत्र में प्रावधान किया जाता है, तो अप्रैल से सरकारी कनेक्शनों को प्रीपेड किया जा सकता है।

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