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सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बावजूद प्रक्रिया रुकी, NMC के निर्देश पर शुरू हुई काउंसलिंग बीच में थमी

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बिलासपुर: सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिलने के बावजूद राज्य सरकार ने पीजी मेडिकल प्रवेश की काउंसलिंग और रिजल्ट जारी नहीं किया है। इससे सैकड़ों मेडिकल स्नातकों का भविष्य अनिश्चित हो गया है। नेशनल मेडिकल काउंसिल के निर्देश पर शुरू हुई प्रवेश प्रक्रिया बीच में रोक दी गई।

मेरिट लिस्ट जारी हो चुकी है, कई छात्र चयनित भी हो गए, लेकिन काउंसलिंग आगे नहीं बढ़ाई जा रही, जिससे छात्र असमंजस और तनाव में हैं।

मेरिट लिस्ट भी जारी कर दी गई

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामले की अंतिम सुनवाई हाई कोर्ट में मार्च में होगी। राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नेशनल मेडिकल काउंसिल के निर्देशों के तहत पीजी मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया शुरू की थी।

ऑनलाइन पंजीयन के बाद मेरिट लिस्ट भी जारी कर दी गई। इसके बाद अचानक काउंसलिंग कमेटी ने प्रक्रिया स्थगित कर दी। इसी बीच हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ डॉ. समृद्धि दुबे के प्रकरण में राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, लेकिन वहां अंतरिम राहत देने से इन्कार कर दिया गया।

नए नियमों को हाई कोर्ट में चुनौती

एक दिसंबर को राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए प्रवेश नियमों में संशोधन कर दिया। इसके बावजूद राजस्थान के एक छात्र ने नए नियमों को हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि इस याचिका के तहत होने वाले सभी प्रवेश न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी कोई नई तारीख या रोक नहीं लगाई, लेकिन राज्य सरकार ने फिर भी पीजी प्रवेश का रिजल्ट जारी नहीं किया।

नहीं है भ्रम की स्थिति

हाई कोर्ट में दायर याचिकाओं में तर्क दिया गया है कि 50 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा के बाद बचे 50 प्रतिशत में से 25 प्रतिशत सीटें राज्य में एमबीबीएस करने वालों के लिए और 25 प्रतिशत ओपन कर दी गई हैं, जो छत्तीसगढ़ के छात्रों के साथ अन्याय है।
वहीं राज्य सरकार और डॉ. समृद्धि दुबे की ओर से कहा गया है कि संस्थागत और गैर- संस्थागत दोनों वर्गों में छत्तीसगढ़ के एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग छात्रों के लिए आरक्षण बना हुआ है, इसलिए भ्रम की स्थिति नहीं है।

छात्रों का क्या कहना है

मामले की अंतिम सुनवाई हाई कोर्ट में मार्च में प्रस्तावित है। तब तक रिजल्ट और काउंसलिंग रोके जाने से छात्र न आगे की तैयारी कर पा रहे हैं, न वैकल्पिक रास्ता चुन पा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने कोई रोक नहीं लगाई, तो सरकार को प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।

मेरिट में नाम, पर प्रवेश नहीं

खास बात यह है कि याचिकाकर्ताओं सहित सभी पात्र छात्रों के नाम मेरिट लिस्ट में आ चुके हैं। चार छात्रों का चयन ऑल इंडिया कोटे से हो चुका है और वे प्रवेश भी ले चुके हैं। इसके बावजूद राज्य कोटे की काउंसलिंग और रिजल्ट रोके जाने से बाकी छात्रों के साथ असमान स्थिति बन गई है।
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