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जीवनदायिनी सलिहाभांठा टाटीनाला को कर रहे छलनी, दिन दहाड़े रेत निकाल और वनमार्ग से परिवहन, अनियंत्रित खनन जलीय जीवन और जंगल के रास्ते परिवहन परिस्थितिकी तंत्र पर विनाशकारी प्रभाव डाल रहा

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अनुविभागीय राजस्व दंडाधिकारी द्वारा की गई कार्रवाई तो निचले स्तर के अधिकारी रंगदारी वसूली में मस्त.

माइनिंग व वन विभाग चुप्पी साधे बैठे.

कोरबा/पाली:- पाली विकासखण्ड के पोड़ी में जीवनदायिनी सलिहाभांठा स्थित टाटीनाला नदी को छलनी करने वाले कारोबारी रेत का काला कारोबार चला रहे है। जिम्मेदार अधिकारियों में कुछ ने इस पर नियमो के तहत कार्रवाई की तो कुछ रंगदारी वसूली में लगे है, वहीं कुछ ने चुप्पी साध रखी है। इससे कारोबारी दिन दहाड़े टाटीनाला नदी से व्यापक स्तर पर रेत उत्खनन कर वनमार्ग से परिवहन करा रहे है। संबंधित विभागों के कुछ जिम्मेदारों का रेत कारोबारी से गठजोड़ के कारण जहां टाटीनाला नदी के मूलस्वरूप से छेड़छाड़ करने के प्रयास जोरो पर हो रहे है, जिससे शासन के राजस्व को भी नुकसान पहुँचाया जा रहा है।

पाली ब्लाक के ग्राम ढुकुपथरा से कुछ दूर पहले जंगल के डेढ़ किलोमीटर रास्ते प्रतिदिन दर्जनों ट्रैक्टर दिन दहाड़े बिना अंकुश टाटीनाला नदी से रेत खनन कर परिवहन करते देखे जा रहे है। अनुविभागीय दंडाधिकारी (राजस्व) ने तो शासन- प्रशासन के निर्देशानुसार अवैध रेत उत्खनन व परिवहन करते कई ट्रैक्टरों पर नियमानुसार कार्रवाई की है, लेकिन निचले स्तर के राजस्व अधिकारी मामले में रंगदारी वसूली में मस्त है, जबकि माइनिंग और वन विभाग सबकुछ जानकर भी अनजान बना हुआ है।

राजस्व नायब अधिकारी तो कोराम पूर्ति के लिए पहुँचते है और जो भी वाहन मौके से मिलता है उस पर कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता कर चल देते है, तो वहीं वनमार्ग के उपयोग को लेकर जमीनी स्तर के वनकर्मी प्रति ट्रैक्टर 2 से 3 हजार माहवारी वसूल रहे है। बताया जा रहा है कि रसूखदारों व राजनैतिक संरक्षण पर काली रेत का कारोबार करने वालो को किसी का खौफ नही है।

दर्जनों ट्रैक्टर वाहनों से जंगल के रास्ते से रेत के परिवहन से न केवल नदी का अस्तित्व खतरे में है, बल्कि वनमार्ग भी नष्ट हो रहे है। यह अनियंत्रित खनन नदी तल का क्षरण, जल स्तर की कमी, उपजाऊ भूमि की हानि और जलीय आवास को क्षति पहुँचा रहा है, साथ ही वन क्षेत्र और पर्यावरण जैसे वन परिस्थितिकी तंत्र पर विनाशकारी प्रभाव डाल रहा है। स्थानीय लोगों ने इस पर तत्काल कार्रवाई कर अंकुश लगाने मांग की है।

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