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धान खरीदी की मियाद बढ़ने के बीच कवर्धा में बड़ा प्रशासनिक एक्शन, 7 करोड़ के धान शॉर्टेज पर विवादित बयान देने वाले डीएमओ अभिषेक मिश्रा तत्काल निलंबित

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रायपुर | कवर्धा

छत्तीसगढ़ में जहां एक ओर धान खरीदी की मियाद दो दिनों के लिए बढ़ाई गई है, वहीं दूसरी ओर कवर्धा जिले से जुड़ा 7 करोड़ रुपये के धान शॉर्टेज मामला शासन के लिए बड़ी कार्रवाई का कारण बन गया है। इस प्रकरण में विवादित और भ्रामक बयान देने वाले जिला विपणन अधिकारी (डीएमओ) अभिषेक मिश्रा को 3 फरवरी 2026 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है

यह कार्रवाई प्रबंध संचालक, राज्य स्तर रायपुर द्वारा की गई है। निलंबन आदेश की प्रति बुधवार को जारी होते ही जिला प्रशासन में हड़कंप की स्थिति बन गई।


मीडिया में दिए गए बयान बने निलंबन की वजह

प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीएमओ अभिषेक मिश्रा पर मीडिया को भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना जानकारी देने का आरोप है। दरअसल, जब कवर्धा में धान की भारी कमी को लेकर मीडिया ने उनसे सवाल किए थे, तब 7 जनवरी 2026 को उन्होंने धान की कमी का कारण मौसम, चूहा और दीमक द्वारा धान खा जाना बताया था

इस बयान के सामने आते ही मामला तूल पकड़ गया। सोशल मीडिया पर बयान की व्यापक आलोचना हुई और प्रदेशभर में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे।


7 करोड़ रुपये के धान की गड़बड़ी का पूरा मामला

साल 2024-25 में किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदा गया धान कवर्धा जिले के चारभाठा स्थित धान संग्रहण केंद्र में रखा गया था। वर्ष 2026 की धान खरीदी से पहले जब पुराने स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया गया, तो करीब 26 हजार क्विंटल धान की भारी कमी सामने आई।

इस धान की अनुमानित कीमत लगभग 7 करोड़ रुपये आंकी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच समिति गठित की।


जांच में क्या आया सामने

जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि तत्कालीन संग्रहण केंद्र प्रभारी प्रितेश पांडेय की भूमिका संदिग्ध रही है। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़ के प्रमाण भी मिले।

प्रशासन ने पहले ही प्रितेश पांडेय को निलंबित कर दिया था। इसके बाद जब मीडिया ने पूरे मामले पर डीएमओ अभिषेक मिश्रा से सवाल पूछे, तो उनका चूहा-दीमक वाला बयान प्रशासन के लिए असहज स्थिति का कारण बन गया।


राजनीतिक विरोध और जनाक्रोश

इस बयान के बाद कांग्रेस और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी) ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। दबाव बढ़ने के बाद राज्य स्तर से कार्रवाई का निर्णय लिया गया।


धान खरीदी जैसे संवेदनशील विषय पर गैर-जिम्मेदार बयान देना एक अधिकारी को भारी पड़ गया। डीएमओ अभिषेक मिश्रा का निलंबन यह स्पष्ट संकेत है कि शासन अब ऐसे मामलों में कड़ी जवाबदेही तय करने के मूड में है।


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