‘एक रक्षासूत्र मास्क का’ इतिहास रचने की ओर — राकेश नारायण


सभी धर्मों का मूल भाव 'जग-कल्याण, जन-कल्याण' ही होता है। इसी तरह सभी धर्मों के तीज-त्योहार, रीति,परम्पराओं के मनाए जाने का मूल भी मानव कल्याण,खुशी,आनंद, उत्साह, उल्लास होता है। भले ही सैकड़ों वर्षों से चली आ रही परम्पराओं के स्वरुप समय के साथ-साथ परिवर्तित होने लगते हैं और आधुनिकता का स्वरुप ग्रहण करने लगते हैं, जो संस्कृति एवं सभ्यताओं के विकास के साथ स्वाभाविक भी है लेकिन मूल भावना जन-कल्याण, जग-कल्याण ही रहता है। पुलिस प्रशासन का भी उद्देश्य,यूॅं कहें तो अपराध नियंत्रण,अपराधों के विवेचन,क्षेत्र का निरीक्षण, शांति व्यवस्था कायम रखना,देश की कानून व्यवस्था को संभालना, आपराधिक गतिविधियों को रोकना, अपराधियों को पकड़ना, घटित अपराधों की खोजबीन करना, देश की आंतरिक सम्पत्ति की रक्षा करना, अपराधी के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य जुटाना, मुलजिम को अदालत को सौंपना आदि हैं लेकिन इन सबके मूल में नागरिक सुरक्षा पुलिस का पहला कर्त्तव्य है इस तरह जो मूल भाव, मूल कर्त्तव्य है वह जन-कल्याण, जग-कल्याण ही है। रायगढ़ जिले में एक इतिहास रचा जा रहा है। भाई-बहन के पवित्र प्रेम का त्योहार और पुलिस प्रशासन के मानवीय पहल का इतिहास "एक रक्षासूत्र मास्क का"। कोरोनावायरस संक्रमण काल ने जीवन के विविध क्षेत्रों के लिए ही नहीं बल्कि 'जीवन के लिए' ही कठिन चुनौती पेश कर दी है। संक्रमण का काला दौर जीवन के विविध क्षेत्रों को बाधित करने के लिए लालायित है बावजूद कोरोना योद्धा डटे हुए हैं। डाक्टर, पुलिस, स्वास्थ्य कर्मी शुरू से ही मैदान-ए-जंग में मुस्तैद हैं। पुलिस न केवल व्यवस्था संभालने में लगी है वरन् दो कदम आगे बढ़कर 'स्वास्थ्य जागरूकता महाभियान' में भी प्रत्यक्ष भागीदारी निभा रही है। "एक रक्षासूत्र मास्क का" अभियान कोरोना को टक्कर देने वाला व्यापक क्षेत्ररक्षण महाभियान है जो जन-जन तक पहुंच कर जन-मन को एक साथ जोड़ेगा। तात्कालिक रूप से इस सच्चाई को स्वीकारा जाना चाहिए कि अभी फिलहाल कोरोना वायरस से सुरक्षात्मक उपाय से ही बचा जा सकता है और इसके लिए मास्क का प्रयोग बहुत जरूरी है। जब-तक वैक्सीन न निकल जाए फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन, सेनेटाइजर एवं मास्क का प्रयोग, बार-बार हाथों की सफाई, भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूरी, अनावश्यक घर से बाहर न निकलना जैसे सावधानियों पर सतत् ध्यान बनाए रखना अनिवार्य है। मास्क लगाए जाने का महाभियान छेड़ कर, दस लाख मास्क वितरण लक्ष्य, प्रत्यक्ष रूप से जनता को सुरक्षित रखने का हिमालयीन महानिर्णय है। धन्य हैं रायगढ़ जिला पुलिस मुखिया, धन्य हैं पुलिस प्रशासन और सबसे ज्यादा धन्य हैं क्षेत्र के समाजसेवी, सेवाभावी व्यक्तित्व, जो इस महायज्ञ में अपनी आहूति देकर इसे सफल बनाने में दिन-रात लगे हैं। राखी का त्योहार प्रेम, समर्पण, सुरक्षा के प्रति सर्वस्व न्यौछावर कर देने का त्योहार है। जन-जन के सुरक्षा का कृत संकल्प लेकर समाज के रक्षकों ने "एक रक्षासूत्र मास्क का" आह्वान किया है जो परंपराओं को साथ लेकर आधुनिक नव चुनौती को परास्त करने का बीड़ा है। जनसहयोग से रायगढ़ नव इतिहास रचने जा रहा है। काश, कभी ऐसा होता कि जड़ों से जुड़कर, जड़ न होकर, पुष्पित-पल्लवित, पत्तो-शाखाओं के साथ आधुनिकता के नव विहान में सदैव जागृत रहते। विभिन्न परम्परागत तीज-त्योहारों में जनकल्याण के विभिन्न आदर्शों को लेकर नूतन लक्ष्य निर्धारित करते। आज कोरोनावायरस संकट के कारण रक्षाबंधन त्योहार में मास्क का अभियान छेड़े हैं इसी तरह अन्य लक्ष्यों को लेकर भी समय-समय पर हम मुखर होते जो सर्वहितकारी होता। इसी तरह चलते-चलते 'सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:' के लक्ष्य को कभी न कभी तो पा ही लेते। दृढ़संकल्प से क्या नहीं हो सकता, आखिर यह संकल्प शक्ति का ही तो कमाल है जो रायगढ़ जिला इतिहास रचने जा रहा है 'दस लाख मास्क के लक्ष्य' का। आइए, आप और हम सब मिलकर इस महाभियान की ओर आगे बढ़ें, इस रंक्षाबंधन -- "एक रक्षासूत्र मास्क का"।
— राकेश नारायण बंजारे
खरसिया
जिला रायगढ़ छग





