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अब 9वीं–11वीं की परीक्षा भी बोर्ड तर्ज पर, फेल होने पर मिलेगा उसी सत्र में दूसरा मौका

वार्षिक परीक्षा 23 फरवरी से 17 मार्च तक, जून–जुलाई में होगी दूसरी परीक्षा; प्रश्नपत्रों की सुरक्षा रहेगी 10वीं–12वीं बोर्ड जैसी सख्त

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा 9वीं और 11वीं की वार्षिक परीक्षाएं अब बोर्ड पैटर्न पर आयोजित की जाएंगी। नई व्यवस्था के तहत किसी भी विषय में अनुत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को उसी शैक्षणिक सत्र में दोबारा परीक्षा देने का अवसर मिलेगा, जिससे उनका साल खराब नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 10वीं और 12वीं में पूरक परीक्षा समाप्त कर फेल विषयों की पुनर्परीक्षा की व्यवस्था पहले ही लागू की जा चुकी है।


प्रश्नपत्र थानों में सुरक्षित, परीक्षा प्रक्रिया में सख्ती और पारदर्शिता

परीक्षा संचालन से लेकर मूल्यांकन तक पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और गुणवत्ता युक्त बनाने के लिए कड़े प्रबंध किए गए हैं। 9वीं और 11वीं के प्रश्नपत्रों की सुरक्षा 10वीं–12वीं बोर्ड परीक्षा की तर्ज पर होगी और इन्हें थानों में सुरक्षित रखा जाएगा।

प्रश्नपत्रों का निर्माण मध्य प्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी और केंद्राध्यक्षों के माध्यम से प्रश्नपत्र संबंधित स्कूलों तक पहुंचाए जाएंगे। परीक्षा दिवस पर ही केंद्राध्यक्ष की निगरानी में प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्रों तक पहुंचेंगे। परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र भी ऑनलाइन जारी किए जाएंगे।


जून–जुलाई में दूसरा चरण, अंक सुधार का भी मिलेगा अवसर

पहली वार्षिक परीक्षा 23 फरवरी से 17 मार्च तक आयोजित होगी और परिणाम अप्रैल के अंत तक घोषित होने की संभावना है। इसके बाद जून या जुलाई में दूसरे चरण की परीक्षा आयोजित की जाएगी।

दूसरी परीक्षा में अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों को दूसरा मौका मिलेगा। साथ ही कम अंकों से असंतुष्ट छात्र-छात्राएं अंक सुधार के लिए भी इस परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। बीमारी या अन्य कारणों से मुख्य परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों को भी इसी परीक्षा के माध्यम से अपना शैक्षणिक वर्ष बचाने का अवसर मिलेगा।

सफल विद्यार्थियों को उसी सत्र में अगली कक्षा में पदोन्नति दी जाएगी। 10वीं और 12वीं में प्रोविजनल प्रवेश की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि अगस्त से नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो।

नई प्रणाली को विद्यार्थियों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो न केवल परीक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा बल्कि छात्रों को आत्मविश्वास और अवसर भी प्रदान करेगा।

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