
होली केवल रंगों का नहीं, आत्मिक जागरण और सकारात्मक परिवर्तन का पर्व
रायगढ़। होलिका दहन के पावन अवसर पर बनोरा में पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि होली का पर्व केवल बाहरी रंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मा को शांति, प्रेम, आनंद और पवित्रता से भरने का अवसर है। उन्होंने कहा कि होलिका दहन की परंपरा में ईश्वर भक्ति और सत्य की विजय का अद्भुत संदेश निहित है, जिससे समाज को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
हिरण्यकश्यप और भक्त प्रह्लाद की कथा से मिलता है अटूट भक्ति का संदेश
बाबा प्रियदर्शी राम ने हिरण्यकश्यप और भक्त प्रह्लाद की कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार अहंकार और अत्याचार का अंत निश्चित होता है, जबकि निष्ठावान भक्ति करने वाले की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं। उन्होंने कहा कि हिरण्यकश्यप ने वरदान प्राप्त कर स्वयं को सर्वशक्तिमान समझ लिया, किंतु ईश्वर की लीला के आगे उसका अहंकार टिक नहीं सका। होलिका भी अपने वरदान के अहंकार में भक्त प्रह्लाद को जलाने बैठी, परंतु दैवी कृपा से वह स्वयं अग्नि में भस्म हो गई और प्रह्लाद सुरक्षित रहे। यह घटना दर्शाती है कि सच्ची भक्ति करने वाले की रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं।
युवाओं से भारतीय संस्कृति को अपनाने और पश्चिमी प्रभाव से दूर रहने का आह्वान
उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे भारतीय त्योहारों के आध्यात्मिक और नैतिक संदेशों को अपने जीवन में उतारें। होली हमें क्रोध, अहंकार, लोभ और मोह जैसे आंतरिक विकारों को त्यागने की प्रेरणा देती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि वास्तविक आनंद और शांति बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि आत्मा की पवित्रता में निहित है।
समाज को प्रेम, शांति और सद्भाव का संदेश
बाबा प्रियदर्शी राम ने कहा कि होली का आध्यात्मिक महत्व हमें भीतर की नकारात्मकता को जलाकर प्रेम और सद्भाव को बढ़ावा देने का संदेश देता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को होली की शुभकामनाएं देते हुए समाज में आपसी भाईचारा, नैतिकता और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया।






