
नई दिल्ली/रायपुर | छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के बीच करीब 2,000 करोड़ रुपये के बकाया बिजली बिल को लेकर चल रहा पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में है। सात साल से लंबित इस वित्तीय गतिरोध को सुलझाने के लिए दोनों राज्य बातचीत को तैयार हैं, लेकिन अब बैठक स्थल को लेकर नया पेंच फंस गया है—वार्ता रायपुर में हो या हैदराबाद में, इस पर सहमति नहीं बन पा रही है।
1000 मेगावाट बिजली आपूर्ति समझौते से शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ राज्य बिजली कंपनी और तेलंगाना के बीच 1000 मेगावाट बिजली आपूर्ति का समझौता हुआ था। शुरुआत में भुगतान नियमित रूप से हुआ, लेकिन बाद में तेलंगाना सरकार ने भुगतान रोक दिया।
3600 करोड़ तक पहुंचा था कुल बकाया, 2000 करोड़ अब भी लंबित
धीरे-धीरे यह बकाया बढ़कर लगभग 3600 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। बाद में तेलंगाना सरकार ने करीब 1600 करोड़ रुपये का भुगतान किश्तों में किया, लेकिन अभी भी लगभग 2000 करोड़ रुपये बकाया बताया जा रहा है। छत्तीसगढ़ पक्ष का कहना है कि भुगतान न होने के कारण बिजली आपूर्ति पहले ही बंद की जा चुकी है।
राजनीतिक आरोपों से और गरमाया मामला
यह मामला अब केवल वित्तीय नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक रंग भी ले चुका है। तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार ने पूर्ववर्ती केसीआर सरकार पर महंगे दामों पर बिजली खरीदने और लगभग 1300 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। वहीं इस पूरे मामले की जांच न्यायिक आयोग द्वारा की जा रही है।
बातचीत पर टिकी समाधान की उम्मीद
दोनों राज्यों के बीच वार्ता से समाधान की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन बैठक स्थल को लेकर जारी असहमति ने प्रक्रिया को फिलहाल आगे बढ़ने से रोक दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि यह लंबित विवाद कब सुलझेगा।






