छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में पत्रकार से मारपीट: किसान सम्मान निधि जवाब देने के बजाय अधिकारी का हमला, बीच बचाव करने आए वकील को भी पीटा


CG Journalist Assault: छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में जो हुआ, वह सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि सिस्टम की असहजता को दिखाता है। मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। जिसमें एक पत्रकार ने PM किसान सम्मान निधि पर सवाल पूछा एक ऐसा सवाल जो जनता के पैसे और हक से जुड़ा है। लेकिन जवाब देने के बजाय, आरोप है कि संबंधित अधिकारी ने हिंसा का रास्ता चुना। यह घटना बताती है कि जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति कितनी गहरी हो चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक बहस के दौरान अधिकारी का रवैया आक्रामक हो गया और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। एक पत्रकार, जो सवाल लेकर गया था, उसे जवाब नहीं बल्कि मारपीट मिली। जब संस्थाएं सवालों को दबाने लगती हैं, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति नहीं पूरे भरोसे पर चोट होती है।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब बीच-बचाव करने पहुंचे वकील को भी नहीं बख्शा गया। यह संकेत है कि मौके पर कानून और व्यवस्था की परवाह किए बिना हिंसा हुई। अगर कानून के जानकार भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक की सुरक्षा को लेकर स्वाभाविक रूप से चिंता बढ़ती है।
स्थानीय स्तर पर लोगों में नाराजगी है। सवाल उठ रहे हैं क्या सरकारी अधिकारी सवालों से ऊपर हैं? क्या योजनाओं पर जवाब मांगना अपराध है? लोकतंत्र में पारदर्शिता तभी संभव है जब सवालों का जवाब दिया जाए, न कि उन्हें दबाया जाए।
घटना के बाद कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। पत्रकार संगठनों और स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच और सख्त कदम उठाने की बात कही है। अब निगाहें प्रशासन पर हैं—क्या यह मामला उदाहरण बनेगा, या फिर एक और घटना बनकर रह जाएगा?