सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ऑनलाइन और फैंटसी गेमिंग कंपनियों को झटका, 28% GST बरकरार

नई दिल्ली। ऑनलाइन और फैंटसी गेमिंग उद्योग से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में देश की सर्वोच्च अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को राहत देने से इनकार करते हुए दांव पर लगाई गई पूरी राशि पर 28 प्रतिशत जीएसटी लागू रखने के सरकार के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों पर लगाया गया जीएसटी संवैधानिक रूप से वैध है।
गेमिंग कंपनियों की याचिकाएं खारिज
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया। कंपनियों ने सरकार द्वारा जारी जीएसटी नोटिस और टैक्स व्यवस्था को चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म केवल मध्यस्थ नहीं बल्कि कर योग्य आपूर्ति (Taxable Supply) के दायरे में आते हैं।
पैसे का दांव लगा तो जीएसटी के नजरिए से जुआ-सट्टा
सुनवाई के दौरान अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी खेल का कौशल आधारित (Skill-based) या किस्मत आधारित (Chance-based) होना अकेले निर्णायक कारक नहीं है। यदि किसी अनिश्चित परिणाम पर धन लगाया जाता है, तो जीएसटी ढांचे के तहत उसे सट्टेबाजी और जुए की श्रेणी में माना जा सकता है।
कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर पड़ सकता है असर
इस फैसले के बाद गेमिंग कंपनियों को प्लेटफॉर्म फीस या केवल ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यू (GGR) पर नहीं, बल्कि खिलाड़ियों द्वारा दांव पर लगाई गई पूरी राशि पर 28 प्रतिशत जीएसटी देना होगा। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार इससे कई कंपनियों के लाभ और व्यावसायिक मॉडल पर असर पड़ सकता है।
पुरानी अवधि पर टैक्स वसूली को भी मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में किए गए जीएसटी संशोधनों को पूर्व प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू करने के सरकार के अधिकार को भी सही ठहराया। इससे पहले जारी किए गए जीएसटी नोटिस भी प्रभावी बने रहेंगे।





