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NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, NTA से पूछा- निगरानी के बावजूद कैसे हुई इतनी बड़ी चूक?

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नई दिल्ली। नीट-यूजी (NEET-UG) प्रश्नपत्र लीक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि निगरानी तंत्र और मॉनिटरिंग कमेटियों के बावजूद इतनी बड़ी गड़बड़ी होना गंभीर चिंता का विषय है। कोर्ट ने UPSC की परीक्षा व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि देश की सबसे बड़ी सिविल सेवा परीक्षा में इस तरह की घटनाएं नहीं होतीं, इसलिए NTA को उससे सीख लेने की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- आखिर निगरानी कितनी प्रभावी थी?

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने डॉ. राधाकृष्णन से सवाल किया कि समिति की सिफारिशों के बाद उनकी निगरानी आखिर कितनी प्रभावी रही। कोर्ट ने यह भी पूछा कि आखिर किन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसके कारण पहले से सुरक्षा उपाय लागू होने के बावजूद पेपर लीक जैसी घटना सामने आई।

अदालत ने NTA और डॉ. राधाकृष्णन द्वारा दाखिल हलफनामों को रिकॉर्ड में लेते हुए केंद्र सरकार को भी विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है।

कोर्ट बोला- युवाओं का भरोसा टूटना बेहद दुखद

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि लाखों छात्र इस परीक्षा के लिए वर्षों मेहनत करते हैं और ऐसी घटनाएं उनके भरोसे और भविष्य पर गहरा असर डालती हैं। उन्होंने कहा कि “हमें अपने युवाओं को निराश नहीं करना चाहिए। यह उनके लिए बेहद दुखद है क्योंकि उन्होंने इसमें अपना समय और भावनाएं लगाई हैं।”

परीक्षा सुरक्षा को लेकर दिए सुझाव

सुनवाई के दौरान वकीलों ने सुझाव दिया कि प्रश्नपत्र छपाई और वितरण प्रक्रिया पर विशेष निगरानी की जरूरत है। इस पर कोर्ट ने कहा कि विशेषज्ञों और प्रमुख विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर एक छोटी निगरानी समिति बनाई जा सकती है, जो लगातार परीक्षा प्रणाली की समीक्षा करे।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा कि IIT जैसे संस्थानों से तकनीकी सुझाव लिए जा सकते हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि नई तकनीकों और AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी काम होना चाहिए।

केंद्र सरकार से मांगा विस्तृत प्लान

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह हलफनामे में यह स्पष्ट करे कि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। कोर्ट ने यह भी पूछा कि विशेषज्ञ कर्मियों की नियुक्ति और संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या स्थायी ढांचा तैयार किया जा रहा है।

अदालत ने कहा कि NTA के पास परीक्षा संचालन के लिए पर्याप्त “भौतिक और बौद्धिक संसाधन” होना जरूरी है। कोर्ट ने केंद्र को 2 जुलाई से पहले अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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