लोरमी में बहादुरी की मिसाल: कुएं में गिरी महिला को सामाजिक कार्यकर्ता ने अपनी जान जोखिम में डालकर बचाया

इलाके में मचा हड़कंप
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम सुरही निवासी बजरहिन बैगा (45 वर्ष) रविवार सुबह पानी भरने के लिए कुएं पर पहुंची थीं। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वे सीधे गहरे कुएं में जा गिरीं। महिला के कुएं में गिरते ही मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया और ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
सामाजिक कार्यकर्ता ने बचाई महिला की जान
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्राम जाकड़बांधा के सामाजिक कार्यकर्ता दिलहरन मसराम ने बिना समय गंवाए साहसिक कदम उठाया। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना कुएं में उतरकर महिला तक पहुंच बनाई और काफी मशक्कत के बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
महिला को सुरक्षित बाहर निकाला गया
दिलहरन मसराम की त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया। महिला को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। घटना के बाद क्षेत्रवासियों ने दिलहरन मसराम की बहादुरी, मानवता और सेवा भावना की जमकर प्रशंसा करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
रामसागर तालाब में डूबने से राजमिस्त्री की मौत
वहीं धमतरी जिले के कुरुद नगर स्थित ऐतिहासिक रामसागर तालाब में शनिवार 30 मई दोपहर जलांजलि के दौरान डूबे युवक का शव रविवार 31 मई सुबह बरामद कर लिया गया है। मृतक की पहचान ग्राम उमरदा निवासी संतोष कंवर (40 वर्ष) के रूप में हुई है। गोताखोरों की टीम ने करीब 18 घंटे की मशक्कत के बाद रविवार सुबह 7:15 बजे शव को पानी से बाहर निकाला। इस हादसे के बाद से मृतक के परिवार और पूरे उमरदा गाँव में मातम पसरा हुआ है।
दसगात्र कार्यक्रम के दौरान हुआ हादसा
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पेशे से राजमिस्त्री संतोष कंवर शनिवार को कुरुद में आयोजित अपने एक पारिवारिक दसगात्र कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। दोपहर के समय जब वे अन्य लोगों के साथ रामसागर तालाब में जलांजलि देने उतरे, तभी अचानक गहरे पानी में चले गए। वहाँ मौजूद लोग जब तक कुछ समझ पाते, संतोष आँखों से ओझल हो चुके थे।
शनिवार से रविवार सुबह तक चला सर्च ऑपरेशन
घटना के तुरंत बाद स्थानीय युवाओं और कुरुद पुलिस ने खोजबीन शुरू की। बाद में धमतरी से गोताखोरों की विशेष टीम बुलाई गई। शनिवार देर रात तक तलाश जारी रही, लेकिन अंधेरा और पानी में दृश्यता कम होने के कारण ऑपरेशन को रोकना पड़ा था। रविवार सुबह सूर्योदय के साथ ही दोबारा रेस्क्यू शुरू किया गया और सुबह सवा सात बजे गोताखोरों को संतोष का शव ढूंढने में सफलता मिली।
सामाजिक संस्थाओं ने बढ़ाया मदद का हाथ
थाना प्रभारी अवध राम साहू के नेतृत्व में पुलिस बल कानून-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण के लिए मौके पर डटा रहा। वहीं, वंदेमातरम सेवा समिति एवं बोलबम सेवा समिति के अध्यक्ष भानु चंद्राकर व उनके कार्यकर्ताओं ने तत्परता दिखाते हुए एम्बुलेंस की व्यवस्था की और शव को पोस्टमार्टम के लिए मर्चुरी (चीरघर) पहुँचाने में पुलिस व परिजनों की मदद की।
परिवार का इकलौता सहारा थे संतोष
ग्रामीणों ने बताया कि संतोष कंवर अपने परिवार के मुख्य भरण-पोषण करने वाले सदस्य थे। उनकी असमय मौत से परिवार के सामने गहरा संकट खड़ा हो गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पंचनामा किया और पोस्टमार्टम के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया है। इस दर्दनाक हादसे से कुरुद और उमरदा क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है।






