छत्तीसगढ़

राशन कार्ड ई-केवाईसी संकट: 20 लाख लोग प्रक्रिया से बाहर, 3 लाख बुजुर्गों को फिंगर ट्रेस में दिक्कत

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छत्तीसगढ़ में वन नेशन वन योजना के तहत राशन कार्ड के प्रत्येक सदस्य का ई-केवायसी कराना अनिवार्य है। 

रायपुर। छत्तीसगढ़ में वन नेशन वन योजना के तहत राशन कार्ड के प्रत्येक सदस्य का ई-केवायसी कराना अनिवार्य है। केवायसी नहीं कराने वाले सदस्यों को राशन दुकान से खाद्यान्न भी नहीं मिल रहा है। इसके बाद भी प्रदेशभर में 20 लाख सदस्य ऐसे हैं, जिनके ई-केवायसी अब तक नहीं हुए हैं।

इनमें साढ़े 9 लाख सदस्य बच्चे हैं, जिनकी उम्र 5 वर्ष से कम है, वहीं लगभग 3 लाख बुजुर्ग हैं, जिनमें कईयों के फिंगर ही काम नहीं कर रहे हैं। ई-पॉस मशीन के स्कैनर में फिंगर स्वीकार नहीं किए जाने के कारण उनका ई-केवायसी भी रुका हुआ है।

केवायसी नहीं कराने वालों में 4.55 लाख एपीएल सदस्य
केवायसी नहीं कराने वाले सदस्यों में 4 लाख 55 हजार एपीएल कार्ड धारक सदस्य हैं। विभागीय सूत्र के अनुसार इनमें भी लगभग एक लाख सदस्य ऐसे हैं, जो खाद्यान्न लेना ही छोड़ दिए हैं। इनकी संख्या भी रायपुर जिले में एक लाख से अधिक है।

2.73 करोड़ में 2.43 करोड़ का सत्यापन
प्रदेश में कुल राशन कार्डों की संख्या 82 लाख 75 हजार 909 है, वहीं सदस्यों की कुल संख्या 2 करोड़ 73 लाख 31 हजार 975 है। इन सदस्यों में अब तक कुल 2 करोड़ 43 लाख 70 हजार 379 सदस्यों का ईकेवायसी हो चुका है। सत्यापन के बाद इन सदस्यों को खाद्यान्न भी वितरित किया जा रहा है।

रायपुर में 2 लाख, दुर्ग-बिलासपुर में 1 लाख से अधिक सदस्य

प्रदेश में केवायसी नहीं कराने वाले सदस्यों की सबसे अधिक संख्या रायपुर जिले में है। यहां 2 लाख 7 हजार से अधिक सदस्यों ने केवायसी नहीं कराया हैं, जिनमें 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की संख्या 86 हजार से ज्यादा हैं, वहीं लगभग 10 से 12 हजार बुजुर्ग हैं। इसी प्रकार दुर्ग में 1 लाख 35 हजार एवं बिलासपुर में 1 लाख 23 हजार से ज्यादा सदस्यों का केवायसी नहीं हुआ है। दुर्ग में 5 वर्ष से बच्चों की संख्या 50 हजार एवं बिलासपुर में 70 हजार है, वहीं बुजुर्ग में इनकी संख्या क्रमशः 6 से 7 हजार तथा 4 से 5 हजार है।

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