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धान अनुसंधान के लिए उज्बेकिस्तान के छात्र छत्तीसगढ़ आएंगे, आईजीकेवी में होगा एक्सचेंज प्रोग्राम

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रायपुर। छत्तीसगढ़ कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम बढ़ा रहा है। इसी क्रम में उज्बेकिस्तान के छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल 20 अगस्त को राजधानी रायपुर पहुंचेगा। यह दल इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) का दौरा करेगा और धान की विविध प्रजातियों पर हो रहे शोध एवं अध्ययन प्रक्रिया को समझेगा।

छत्तीसगढ़ को देश का “धान का कटोरा” कहा जाता है। यहां 23,000 से अधिक धान की प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से कई 100 से 150 दिनों में पककर तैयार हो जाती हैं। ये प्रजातियां अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों—सूखा, अधिक वर्षा और नमी वाले इलाकों—के लिए अनुकूलित हैं।

आईजीकेवी में 21 अगस्त को उज्बेक छात्रों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच ब्रेन स्टॉर्मिंग सेशन और इंट्रैक्शन प्रोग्राम आयोजित होगा। इस दौरान शोध, नई तकनीकों और धान की उन्नत किस्मों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

आईजीकेवी और उज्बेकिस्तान के डेनाऊ इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरप्रेन्योरशिप एंड पेडालॉजी (DIEP) के बीच हुए समझौते (MoU) के तहत दोनों देशों के विद्यार्थी स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर पर एक-दूसरे के विश्वविद्यालयों में अध्ययन कर सकेंगे। साथ ही प्रोफेसर और वैज्ञानिक भी आपसी आदान-प्रदान के माध्यम से शिक्षा और अनुसंधान कार्य को नई दिशा देंगे।

आईसीएआर का प्रतिनिधिमंडल भी इस दौरे में शामिल होगा और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उज्बेक प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को लेकर विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं।

कुलपति डॉ. गिरिश चंदेल ने कहा—
“स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम छात्रों और अध्यापकों के लिए बेहद उपयोगी पहल है। इससे न सिर्फ उन्हें वैश्विक शिक्षा प्रणाली और शोध पद्धतियों का अनुभव मिलेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की कृषि शिक्षा को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।”

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