छत्तीसगढ़ में मानसून की जल्द दस्तक के संकेत, बढ़ते तापमान के बीच आने वाले दिनों में उमस और गर्मी बढ़ने के आसार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में इन दिनों मौसम तेजी से करवट ले रहा है। बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम कमजोर पड़ गया है, जिससे प्रदेश में गर्मी लौटने लगी है। इसी बीच मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य तिथि से पहले प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। इससे प्रदेशवासियों को उमस और गर्मी के बीच मिलने वाली राहत की उम्मीद बढ़ गई है।
सिस्टम कमजोर, तापमान में बढ़ोतरी शुरू
प्रदेश में लंबे समय तक गर्मी को थामे रखने वाला सिस्टम अब आगे बढ़ते-बढ़ते कमजोर हो चुका है। इसके चलते दोपहर बाद होने वाली अंधड़ और बरसात की गतिविधियां लगभग थम गई हैं। सोमवार को बादल छंटते ही तेज धूप निकल आई, जिसने वातावरण में मौजूद नमी के साथ मिलकर गर्मी को और अधिक तीखा बना दिया। रायपुर का अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री और बिलासपुर का तापमान 43 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि अधिकतम तापमान में अगले दिनों में 3 से 4 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है, हालांकि नमी अधिक होने से लू चलने की संभावना कम बनी हुई है।
दिन से ज्यादा रात में महसूस होगी उमस
आने वाले दिनों में आर्द्रता का स्तर और बढ़ने वाला है। गर्मी भले दिन में ज्यादा महसूस हो, लेकिन बेचैनी रात में और बढ़ेगी। हवा में लगातार बढ़ती नमी की वजह से रातें ज्यादा असहज होंगी। 26 मई के आसपास केरल तट पर मानसून के पहुंचने से प्रदेश में भी नमी से भरपूर हवाएं आने लगेंगी, जिससे रात की उमस और अधिक महसूस होगी।
मई अंत से प्री-मानसून गतिविधियों की उम्मीद
बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के असर से मई के अंत तक हल्की गर्ज-चमक, तेज हवा और बूंदाबांदी जैसे प्री-मानसून बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इससे तापमान में कुछ कमी आ सकती है और गर्मी से थोड़ी राहत भी मिलने की उम्मीद रहेगी।
7–10 जून के बीच छत्तीसगढ़ में मानसून की संभावना
मौसम विभाग का अनुमान है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून 26 मई तक केरल पहुंच सकता है। यदि इसकी चाल सामान्य रहती है, तो यह 15 दिनों के भीतर मध्य भारत की ओर बढ़ता है। इसी आधार पर इस बार 7 से 10 जून के बीच मानसून के छत्तीसगढ़ पहुंचने की संभावना जताई गई है। सामान्य तिथि 13 जून मानी जाती है, ऐसे में इस वर्ष इसके समय से पहले आने की उम्मीद बन गई है।
पिछले वर्ष की तुलना
पिछले साल मानसून ने 27 मई को दंतेवाड़ा के रास्ते प्रदेश में प्रवेश किया था, लेकिन इसके पूरी तरह सक्रिय होने में काफी समय लग गया था। इस बार शुरुआती संकेत बेहतर हैं, जिससे उम्मीद की जा रही है कि मानसून का असर प्रदेश में तेजी से दिखाई देगा।






