छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी के बीच जल जनित बीमारियों पर सरकार सख्त, शहरी इलाकों में रोकथाम के लिए विशेष अभियान तेज

रायपुर। छत्तीसगढ़ के शहरी इलाकों में भीषण गर्मी के बीच जल जनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने सख्त तेवर अपना लिए हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने एक विस्तृत एडवाइजरी जारी कर स्पष्ट किया है कि पेयजल की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए अब सीधे आम नागरिकों के घरों से पानी के नमूने लिए जाएंगे। इस संबंध में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने राज्य के सभी निगम आयुक्त, पालिकाओं और नगर पंचायतों के सीएमओ को निर्देश भेजा है।
कोलीफार्म बैक्टीरिया की शून्य होनी चाहिए उपस्थिति
सरकारी रिपोटों में यह चिंताजनक खुलासा हुआ है कि सीवरेज और पेयजल पाइपलाइनों में लीकेज के कारण शुद्ध पानी में इ-कोली जैसे घातक बैक्टीरिया मिल चुके हैं। विभाग ने कड़े निर्देश दिए हैं कि पेयजल में कोलीफार्म बैक्टीरिया की उपस्थिति ‘शून्य होनी चाहिए। यदि किसी भी जल स्रोत के सैंपल में यह बैक्टीरिया पाया जाता है, तो वहां से पानी की आपूर्ति तत्काल रोक दी जाएगी और वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर टैंकरों से पानी भेजा जाएगा।
अधिकारियों की जवाबदेही तय
ग्रीष्मकालीन पेयजल संकट से निपटने के लिए नगर निगमों में आयुक्त और नगर पालिकाओं में मुख्य नगरपालिका अधिकारी को ‘नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इन्हें प्रतिदिन प्राप्त होने वाली शिकायतों की खुद समीक्षा करनी होगी। विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि पाइपलाइन के अंतिम छोर तक क्लोरीन की सही मात्रा सुनिश्चित की जाए और इसकी नियमित प्रविष्टि ‘गूगल शीट’ पर अपडेट की जाए।






