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मरीजों के लिए है बन सकता है जान का खतरा
कोर्ट ने इस मामले को जन स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए कहा कि, कुत्ते के काटने के बाद समय पर एंटी-रेबीज और टिटनेस इंजेक्शन नहीं मिलना मरीजों की जान के लिए खतरा बन सकता है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि, जिला अस्पतालों में जरूरी दवाओं और इंजेक्शनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मेडिकल सप्लाई के लिए टेंडर जारी
वहीं छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) की ओर से जानकारी दी गई कि, एंटीजन और अन्य आवश्यक मेडिकल सामग्री की सप्लाई के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने अस्पताल की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया है। कोर्ट कमिश्नर अस्पताल में दवाओं और इंजेक्शनों की उपलब्धता समेत व्यवस्थाओं की जांच कर अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे।
इंजेक्शन की कमी को लेकर मरीज और परिजन थे परेशान
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि, मरीजों को जीवनरक्षक इंजेक्शन के लिए भटकना नहीं पड़ना चाहिए और स्वास्थ्य विभाग को इस दिशा में तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाने होंगे। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से जिला अस्पताल में एंटी-रेबीज इंजेक्शन की कमी को लेकर मरीज और उनके परिजन परेशान थे। कई लोगों को निजी मेडिकल स्टोर से महंगे दामों पर इंजेक्शन खरीदने पड़ रहे थे। अब कोर्ट की निगरानी में इस मामले में जल्द सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।






