महिला आरक्षण बिल पर सियासी घमासान: भाजपा नेता किशोर देवांगन का विपक्ष पर हमला, ‘नारी शक्ति की उड़ान रोकी गई’ का आरोप

विपक्ष ने मातृशक्ति को हराया, मोदी-शाह को नहीं
देवांगन ने कहा कि महिला आरक्षण बिल लोकसभा, दिल्ली विधानसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत सीटें देने वाला ऐतिहासिक कानून है। उनके अनुसार विपक्ष ने इसे गिराकर मातृशक्तियों का अपमान किया है। उनका कहना है कि कांग्रेस की खुशी इस बात को लेकर है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को “हरा दिया”, जबकि सच में हार मातृशक्तियों की हुई है।
महिला अधिकारों पर सीधी चोट
देवांगन ने कहा कि यह घटना सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि करोड़ों महिलाओं के अधिकारों पर सीधी चोट है। उन्होंने बताया कि 2023 के बिल में महिलाओं को लोकसभा की 543 सीटों में से 165 सीटें मिलनी थीं, जबकि वर्तमान परिसीमन के बाद बढ़ी 816 सीटों में 250 से अधिक सीटें महिलाओं को मिल सकती थीं। उनका आरोप है कि इसी बढ़ती शक्ति से डरकर विपक्ष ने बिल गिराया।
30 साल का राजनीतिक खेल
देवांगन ने कहा कि पिछले तीन दशकों से महिला आरक्षण का मुद्दा कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के राजनीतिक स्वार्थ का शिकार होता रहा है। उन्होंने कहा कि 2004-2014 तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने इस बिल को आगे नहीं बढ़ाया और सिर्फ “नारियल फोड़ने” या “फीता काटने” तक सीमित रही।
INDI गठबंधन अपने अस्तित्व को खत्म कर रहा
देवांगन ने कहा कि कांग्रेस के पतन के रास्ते पर उसके सहयोगी दल भी आंख बंद करके चल रहे हैं, जिससे वे भी जनता के बीच अविश्वसनीय होते जा रहे हैं। उनका कहना है कि देश की मातृशक्ति ने विपक्ष का यह “असली रूप” देख लिया है और चुनाव में इसका जवाब देगी।
मोदी-शाह ने पूरी तत्परता दिखाई, फिर भी बिल गिराया गया
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह ने विपक्ष के हर सवाल का समाधान किया और यहां तक कहा कि विपक्ष चाहे तो बिल पास होने का श्रेय ले ले। फिर भी कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने मातृशक्ति के राजनीतिक सशक्तिकरण को रोकने के लिए बिल को गिरा दिया।
विनाश काले विपरीत बुद्धि- देवांगन
अंत में देवांगन ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की भूमिका इस कहावत पर खरी उतरती है- “विनाश काले विपरीत बुद्धि।” उनके अनुसार, विपक्ष ने अपने राजनीतिक अहंकार में देश की मातृशक्ति का अपमान किया है और आने वाले चुनावों में उन्हें इसका परिणाम भुगतना होगा।






