रायगढ़ के चैतन्य टेक्नो स्कूल में सनसनीखेज खुलासा।।

शिक्षिकाओं पर क्रूर मानसिक अत्याचार,जासूसी का दबाव और बिना नोटिस बर्खास्तगी – प्रबंधन का रौबदार चेहरा बेनकाब।।
सिंहघोष/रायगढ़-20.04.26 :- शिक्षा का मंदिर कहलाने वाला श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल (ओडिशा रोड, रायगढ़) आज अपने ही भीतर छिपे अंधेरे की वजह से सुर्खियों में है। दो शिक्षिकाओं ने जिला कलेक्टर को जो शिकायतें सौंपी हैं, वे न सिर्फ दो महिलाओं के व्यक्तिगत अन्याय की कहानी हैं,बल्कि पूरे स्कूल प्रबंधन की काली करतूतों का आईना हैं। मानसिक प्रताड़ना,जबरन त्यागपत्र,अनैतिक जासूसी का दबाव,अयोग्य शिक्षकों की भर्ती और बच्चों की शिक्षा से सीधा खिलवाड़ – आरोप इतने गंभीर और सबूतों से लैस हैं कि अब सवाल यह नहीं कि जांच होनी चाहिए, बल्कि यह कि कितनी जल्दी दोषियों पर गाज गिरेगी।
पहली शिक्षिका, जो पिछले तीन वर्षों से स्कूल में पूर्ण निष्ठा से कार्यरत थीं, ने लिखा है कि स्कूल की तथाकथित प्रिंसिपल (जो खुद को प्रिंसिपल बताती हैं, जबकि वे अधिकृत नहीं हैं) ने उन्हें लगातार मानसिक यातना दी। दबाव इतना असहनीय हो गया कि शिक्षिका की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। लेकिन प्रबंधन ने बीमार बिस्तर पर भी कोई दया नहीं दिखाई। उल्टा, जबरन त्यागपत्र दिलवा लिया गया। शिक्षिका ने इसे “श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन” करार दिया है।
दूसरी शिक्षिका (कक्षा-2 की शिक्षिका), जो एक वर्ष से स्कूल से जुड़ी थीं, ने और भी भयावह खुलासा किया। प्राचार्य ने उन्हें बार-बार अनैतिक आदेश दिया – अन्य शिक्षकों की जासूसी करो, AGM की निजी बातें प्रबंधन को बताओ। जब शिक्षिका ने साफ इनकार कर दिया कि “मैं ऐसा गलत काम नहीं कर सकती” तो बिना किसी पूर्व सूचना,बिना कारण बताए और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के उन्हें सेवा से निकाल दिया गया।
लेकिन यहीं कहानी खत्म नहीं होती। दूसरी शिक्षिका ने स्कूल की कुछ और चौंकाने वाली हकीकतें भी उजागर की हैं:
- कई शिक्षक बिना किसी मान्यता प्राप्त डिग्री के स्कूल में काम कर रहे हैं।
- बच्चे मोबाइल फोन के जरिए पढ़ाई कर रहे हैं क्योंकि शिक्षकों में विषय का पर्याप्त ज्ञान नहीं है।
- योग्यता की जगह चापलूसी और प्रबंधन को खुश रखने की संस्कृति फल-फूल रही है।
- स्कूल का असली मकसद शिक्षा नहीं,बल्कि जितना हो सके एडमिशन लेकर कमाई करना है।
- जो शिक्षक प्राचार्य के अनुचित आदेश नहीं मानते, उन्हें बिना प्रक्रिया के रास्ता दिखा दिया जाता है।
दोनों शिक्षिकाओं ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच हो,दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो और उन्हें न्याय मिले – चाहे नौकरी बहाली हो या उचित मुआवजा। एक शिकायत की प्रतिलिपि जिला शिक्षा अधिकारी को भी भेजी गई है।
यह मामला केवल दो शिक्षिकाओं का नहीं है। यह उन सैकड़ों अभिभावकों का भी है जो अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए इस स्कूल में भेजते हैं। अगर स्कूल प्रबंधन खुद जासूसी, अत्याचार और अयोग्यता का अड्डा बना हुआ है, तो फिर बच्चों का भविष्य किसके भरोसे है? क्या शिक्षा का नाम पर चलने वाला यह कारोबार अब सिर्फ कमाई का साधन बन गया है?
जिला कलेक्टर कार्यालय ने दोनों शिकायतों पर संज्ञान ले लिया है। अब सारा शहर और शिक्षा जगत इंतजार कर रहा है कि कब जांच शुरू होती है और कब सच्चाई सामने आती है।
यह खबर सिर्फ सुर्खी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। रायगढ़ का यह स्कूल या तो अपने अंदर के गंदे खेल को साफ कर ले, वरना सिस्टम की आंधी उसे भी बर्बाद कर देगी। जांच का इंतजार है… लेकिन सवाल पहले ही उठ चुके हैं।
क्या न्याय मिलेगा? या फिर सत्ता और पैसे का खेल फिर से जीत जाएगा?






