केलो डैम क्षेत्र में 2 किमी तक काली मिट्टी का अंबार, राखड़ डंपिंग से नदी पर संकट गहराया

रायगढ़। जिले की जीवनदायिनी केलो नदी एक बार फिर गंभीर पर्यावरणीय संकट के केंद्र में है। केलो डैम से लगे लगभग 2 किलोमीटर क्षेत्र में काली मिट्टी, राखड़ और औद्योगिक अपशिष्ट का विशाल ढेर जमा होने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इसे उद्योगों की मनमानी और प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम बताया है।
नदी किनारे सैकड़ों डंपर अपशिष्ट, नियमों की खुलेआम अनदेखी
चिराईपानी और लारा क्षेत्र सहित केलो नदी किनारे स्थित औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला राखड़ और फ्लाई ऐश कथित रूप से खुलेआम डंप किया जा रहा है। स्थानीय आरोपों के अनुसार, रोजाना सैकड़ों डंपर अपशिष्ट नदी किनारे और आसपास के क्षेत्रों में गिराए जा रहे हैं, जिससे पूरा इलाका काली मिट्टी के ढेर में तब्दील होता जा रहा है।
बरसात में बढ़ेगा प्रदूषण का खतरा
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के दौरान यह राखड़ और काली मिट्टी बहकर सीधे केलो नदी में समा सकती है, जिससे जल प्रदूषण का गंभीर खतरा पैदा होगा। इससे न केवल जलजीव प्रभावित होंगे, बल्कि नदी की प्राकृतिक धारा और पारिस्थितिकी तंत्र पर भी दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।
प्रशासन और विभागों की भूमिका पर सवाल
स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जिला प्रशासन, पर्यावरण विभाग और Kelo Pariyojana इस पूरे मामले में अब तक मौन क्यों हैं। लोगों का आरोप है कि पर्यावरणीय नियमों के स्पष्ट उल्लंघन के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है।
नेताओं और समाजसेवियों ने उठाए सवाल
इस मुद्दे को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के प्रभारी महामंत्री दीपक मंडल ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर वित्त मंत्री और प्रशासन से जवाब मांगा है। वहीं समाजसेवी रामचंद्र शर्मा ने भी इसे “पर्यावरण से गंभीर खिलवाड़” बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों की मांग है कि जिला प्रशासन तत्काल संयुक्त जांच टीम गठित कर मौके का निरीक्षण करे और दोषी उद्योगों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे। साथ ही डंप किए गए अपशिष्ट को हटाकर केलो नदी क्षेत्र को सुरक्षित किया जाए।
पर्यावरण और भविष्य दोनों पर खतरा
यह मामला अब केवल प्रदूषण का नहीं, बल्कि रायगढ़ के पर्यावरण, जनस्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल बन गया है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो केलो नदी के अस्तित्व पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।







