श्रावण पूर्णिमा आज, जानिए पूजा-विधि, महत्व और कौन सी कथा पढ़ना माना जाता है शुभ

धर्म । हिंदू धर्म में श्रावण पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को सुख-शांति की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। वर्ष 2026 में श्रावण पूर्णिमा 27 अगस्त को मनाई जा रही है। यह दिन दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी विशेष फलदायी माना जाता है।
श्रावण पूर्णिमा के हैं कई नाम
श्रावण पूर्णिमा को अलग-अलग क्षेत्रों में कजरी पूनम, नारियल पूर्णिमा और पवित्रोपना जैसे नामों से भी जाना जाता है। इस दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार भगवान शिव, माता पार्वती और चंद्रदेव की पूजा-अर्चना करते हैं।
चंद्रदेव की पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण पूर्णिमा की रात चंद्रदेव को अर्घ्य देने और उनकी पूजा करने से मन को शांति मिलती है। ज्योतिषीय मान्यता में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना गया है, इसलिए चंद्रदोष से पीड़ित लोगों के लिए इस दिन चंद्र पूजा और दान-पुण्य को शुभ माना जाता है।
श्रावण पूर्णिमा पर कौन सी कथा पढ़ें?
इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी कथाओं का श्रवण या पाठ करना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ भी पूर्णिमा के अवसर पर कई परिवारों में किया जाता है। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक एवं क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार कथा का पाठ कर सकते हैं।
कथा पाठ के दौरान भगवान का ध्यान, दीप प्रज्वलित करना और श्रद्धापूर्वक पूजा करना महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा के बाद जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी पुण्यकारी माना गया है।
शिव-पार्वती की पूजा कर मांगें सुख-समृद्धि
श्रावण पूर्णिमा पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शांति लेकर आती है।






