छत्तीसगढ़

रायपुर में ‘ताना-बाना’ समारोह, कोसाला एक्सपीरियंस सेंटर का शुभारंभ

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छत्तीसगढ़ की कोसा बुनाई विरासत को मिलेगा बढ़ावा, कारीगरों के कौशल विकास और आजीविका के नए अवसरों पर जोर

रायपुर, 27 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध कोसा रेशम बुनाई परंपरा के संरक्षण और कारीगर समुदायों के लिए आजीविका के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड की सामाजिक विकास पहल ‘कोसाला’ ने रायपुर में ‘ताना-बाना’ समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर कोसाला एक्सपीरियंस सेंटर का भी शुभारंभ किया गया। यह केंद्र कोसाला की यात्रा, पारंपरिक शिल्प से जुड़े कार्यों और कारीगर समुदायों के लिए संचालित आजीविका संबंधी पहलों को समझने का अवसर प्रदान करेगा।

समारोह में हिंडाल्को के वरिष्ठ अधिकारियों, कारीगर समुदायों और विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में राज्य रेशम विभाग, वीवर्स सर्विस सेंटर और नेशनल हैंडलूम डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएचडीसी) के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया था।

हिंडाल्को की ओर से कोसाला के निदेशक एवं स्पेशियलिटी एल्युमिना बिजनेस के सीईओ सौरभ खेडेकर, केमिकल्स बिजनेस फाइनेंस के प्रमुख उन्नीकृष्णन प्रभाकरन, मुरी के बिजनेस हेड संदीप पाटिल और सीएचआर स्किल डेवलपमेंट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुखेंदु घोष उपस्थित रहे।

कोसा बुनकरों की विरासत को सम्मान

परंपरागत रूप से दिवाली से पहले चांपा में आयोजित होने वाला ताना-बाना समारोह छत्तीसगढ़ की विशिष्ट बुनाई परंपराओं को जीवित रखने वाले बुनकरों और कारीगरों के योगदान को सम्मानित करने का वार्षिक आयोजन है। इस वर्ष रायपुर में आयोजित समारोह में शिल्प के साथ उससे जुड़े लोगों, उनके कौशल और आजीविका के महत्व को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।

इस अवसर पर सौरभ खेडेकर ने कहा कि पारंपरिक शिल्प का संरक्षण और सतत आजीविका के अवसर तैयार करना समावेशी विकास के महत्वपूर्ण पहलू हैं। कोसाला के माध्यम से छत्तीसगढ़ में कोसा की मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के साथ समुदायों को नए कौशल सीखने और स्थायी आजीविका विकसित करने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ताना-बाना समारोह पारंपरिक विरासत को जीवित रखने वाले लोगों के योगदान का उत्सव है, जबकि कोसाला एक्सपीरियंस सेंटर इन प्रयासों और उनके प्रभाव को व्यापक समुदाय तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।

कोसाला एक्सपीरियंस सेंटर में दिखेगी बदलाव की यात्रा

नवस्थापित कोसाला एक्सपीरियंस सेंटर में आगंतुकों को पारंपरिक शिल्प से जुड़ी गतिविधियों, कारीगर समुदायों के साथ किए जा रहे कार्यों और आजीविका के अवसर विकसित करने के प्रयासों की जानकारी मिलेगी।

यह केंद्र केवल शिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी दर्शाएगा कि कौशल विकास, बुनाई की मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और बाजार तक पहुंच बढ़ाने से पारंपरिक ज्ञान को आर्थिक अवसरों में कैसे बदला जा सकता है।

30 महिलाओं को हाथ की कढ़ाई का प्रशिक्षण

वर्ष 2021 में स्थापित कोसाला छत्तीसगढ़ में कोसा रेशम की रीलिंग और बुनाई को पुनर्जीवित करने तथा मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसकी गतिविधियों में कारीगरों की क्षमता बढ़ाना, पारंपरिक कौशल को प्रोत्साहित करना और शिल्प को समकालीन बाजारों से जोड़ना शामिल है।

इसी क्रम में ‘कोसाला कारीगरी—क्राफ्टिंग स्किल्स, क्रिएटिंग लाइवलीहुड्स’ पहल के तहत देवरी गांव की 30 महिलाएं हाथ की कढ़ाई का अल्पकालिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को व्यावहारिक कौशल प्रदान कर उनके लिए आजीविका के अतिरिक्त अवसर विकसित करना है।

कोसाला अपने पारंपरिक बुनाई कार्यों के साथ हाथ की कढ़ाई और वस्त्रों के अलंकरण जैसी कलाओं को भी बढ़ावा दे रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग वस्त्र क्षेत्र की मूल्य श्रृंखला से जुड़ सकें।

करमंदा में 20 महिलाएं सीख रहीं कोसा बुनाई

बुनाई के क्षेत्र में ‘करघाग्राम—बुनाई, सीखने और आजीविका का केंद्र’ पहल के तहत करमंदा गांव में महिलाओं को कोसा बुनाई सीखने का अवसर दिया जा रहा है। स्थानीय ग्राम पंचायत और सरपंच के सहयोग से शुरू की गई इस पहल में 20 महिलाएं प्रशिक्षण से जुड़ी हैं। इनमें 10 अर्ध-कुशल महिलाएं और 10 ऐसी महिलाएं शामिल हैं, जो पहली बार बुनाई का कौशल सीख रही हैं।

कोसाला लाइवलीहुड एंड सोशल फाउंडेशन की सीईओ नीता शाह ने कहा कि पारंपरिक शिल्प का संरक्षण और सतत आजीविका का सृजन साथ-साथ चलना चाहिए। प्रशिक्षण, उचित सहयोग और बाजार के अवसर मिलने से पारंपरिक कौशल को विकसित कर आजीविका का मजबूत माध्यम बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि कोसाला एक्सपीरियंस सेंटर शिल्प के साथ उससे जुड़े समुदायों के जीवन, आकांक्षाओं और प्रयासों को भी सामने लाने का काम करेगा।

कथक प्रस्तुति ने जोड़ा सांस्कृतिक रंग

समारोह के दौरान डॉ. संगीता कापसे की संगीता कला अकादमी की छात्राओं राधिका शर्मा और गीतिका चक्रधर ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। कलाकारों ने कथक की लखनऊ घराना शैली प्रस्तुत कर कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भरा।

18 गांवों में 1,100 से अधिक लोगों तक पहुंच

कोसाला लाइवलीहुड एंड सोशल फाउंडेशन एक सेक्शन-8 कंपनी है, जिसकी स्थापना वर्ष 2021 में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड की सामाजिक विकास पहल के रूप में की गई थी। संस्था छत्तीसगढ़ में कोसा रेशम की रीलिंग और बुनाई को पुनर्जीवित करने के साथ कारीगर समुदायों के लिए सतत आजीविका के अवसर विकसित करने पर काम कर रही है।

संस्था के अनुसार, अब तक जांजगीर-चांपा, रायगढ़ और कोरबा जिलों के 18 गांवों में 1,100 से अधिक कारीगरों और समुदाय के सदस्यों तक क्षमता निर्माण, तकनीकी प्रशिक्षण और आजीविका संबंधी गतिविधियों के माध्यम से पहुंच बनाई गई है।

ताना-बाना समारोह और कोसाला एक्सपीरियंस सेंटर का शुभारंभ पारंपरिक शिल्प के संरक्षण, कौशल विकास और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने की दिशा में पहल है। इसके माध्यम से छत्तीसगढ़ की कोसा बुनाई विरासत को आगे बढ़ाने के साथ वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

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