काँग्रेसी नेता,ठेकेदार को क्यों बचाना चाह रहीं हैं पुलिस:-आलोक पांडे

समाचार का प्रकाशन आत्महत्या का कारण नही बन सकता :- आलोक पांडे
सिंहघोष/रायगढ़-24.04.22- होटल जानकी वाटिका में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान वरिष्ठ पत्रकार,संपादक व कॉंग्रेस पार्षद संजना शर्मा आत्महत्या मामले मे आरोपी अमित पांडे के बड़े भाई आलोक पांडे ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके सहित शहर के लगभग सभी लोग चाहते है,कि मरहूम कांग्रेस पार्षद संजना शर्मा को न्याय मिले। परंतु न्याय मिलना तभी संभव होगा जब मामले की निष्पक्ष जांच होगी अभी जिस पत्र को लेकर पुलिस ने उनके छोटे भाई पत्रकार अमित पांडे को आरोपी बना रही है,वह पत्र सुसाइडल नोट नही है। जिसमें यह लिखा हो कि मैं अमित पांडे से परेशान होकर आत्महत्या कर रही हूं। जिस पत्र को पुलिस प्रस्तुत कर अमित को आरोपी बना रही है वास्तव में वह प्रार्थना पत्र है।
दूसरी बात आत्महत्या की असल वजह जो शहर की चर्चाओं में और स्थानीय समाचार पत्रों,वेब पोर्टलों में प्रकाशित तथ्यों जिसमे किसी कांग्रेसी नेता और ठेकेदार का उल्लेख है उसे पुलिस नजर अंदाज करने में क्यों लगी है? यह समझ नहीं आ रहा है। पुलिस का अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट,कॉल डिटेल व सुसाइड नोट का भी छुपाना संदेहास्पद नजर आ रहा है। इसके अलावा महरूम के पिछले आठ वर्षों की मोबाइल कॉल डिटेल की जांच की जाए तो उससे ही स्थिति साफ होने की भी बात कही व साफ शब्दों कहा कि मृत्तिका से जिसकी एक माह मे 1500 बार बात हुई हो उससे पुलिस पूछताछ तक नहीं की और मेरे भाई जिसने सिर्फ तीन बार बात की (जिसकी बातचीत की रिकोर्डिंग भी मेरे पास सुरक्षित हैं)जल्दबाजी मे उसे आरोपी बना दिया गया पुलिस को इतनी जल्दबाजी क्यों रहीं ?
मैं (आलोक पांडे)चाहता हूं की घटना क्रम की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच हो उसके बाद जो भी आरोपी हो उसे कड़ी सजा दी जाए यही स्व.संजना शर्मा को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर अपने मुख्यमंत्री जी से भी अपील की है। घटना की अगर उच्चस्तरीय या न्यायिक जांच होती है तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा। घटना के असल दोषी कारागार में होंगे। क्योंकि तभी स्व.संजना शर्मा को सही न्याय मिल पाएगा।
जानकारों की मानें तो आरोपी पत्रकार अमित पांडे के भाई आलोक पांडे की उक्त प्रेसवार्ता के बाद शहर में संजना शर्मा प्रकरण पुनः चर्चा में आ गया है। जबकि लोगों के बीच यह बात पुनः आम हो गई है कि दाल में जरूर कुछ काला है। इस तरह रसूकदार काँग्रेसी नेता और ठेकेदार को क्लीन चिट नही दिया जा सकता है।












