
जनसुनवाई को लेकर बढ़ा तनाव
तमनार क्षेत्र में प्रस्तावित Jindal Jan Sunwai को लेकर हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। बड़ी संख्या में ग्रामीण धौरा भाठा स्थित धरना स्थल पर कड़ाके की ठंड में भी डटे हुए हैं। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि इस बार वे जनसुनवाई का टेंट तक नहीं लगने देंगे।
उद्योगों और खनन से परेशान ग्रामीणों की पीड़ा
ग्रामीणों का आरोप है कि तमनार क्षेत्र पहले ही उद्योगों और कोल माइंस की वजह से भारी दबाव झेल रहा है। लगातार हो रहे आदिवासी विस्थापन, जंगलों की कटाई और प्रदूषण ने उनकी जिंदगी को प्रभावित किया है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर और विनाश किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। Jindal Jan Sunwai का विरोध इसी आक्रोश का परिणाम है।

धरना स्थल पर आंदोलनकारियों की प्रतिक्रियाएँ
धरना स्थल पर मौजूद आंदोलनकारियों ने मीडिया को तहसीलदार रायगढ़ के एक लिखित आदेश पत्र की प्रति दिखाते हुए आरोप लगाया कि सरकार हर स्तर पर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, ताकि Jindal Jan Sunwai को सफल बनाया जा सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ दिन पहले आंदोलन का नेतृत्व कर रहे दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के कुछ नेता अचानक मैदान छोड़कर चले गए, जिससे ग्रामीणों में अविश्वास और बढ़ गया है।
प्रशासन ने तैनात किया भारी पुलिस बल
ग्रामीणों के बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। स्थिति को देखते हुए बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब जनता स्पष्ट रूप से विरोध में खड़ी है, तो Jindal Jan Sunwai आखिर कैसे होगी? क्या यह जनसुनवाई केवल विधिक औपचारिकता निभाने के लिए आयोजित की जा रही है?
औपचारिकता के आरोप और ग्रामीणों का संकल्प
ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई, तो आंदोलन और अधिक तेज किया जाएगा। अब सभी की निगाहें सोमवार को प्रस्तावित Jindal Jan Sunwai पर टिक गई हैं, जहां यह तय होगा कि जनता की आवाज सुनी जाएगी या केवल प्रक्रिया को पूरा कर दिया जाएगा।












