CGPSC मामला: पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत 7 के खिलाफ ED की 3700 पन्नों की चार्जशीट

99 पन्नों की अभियोजन शिकायत के साथ दस्तावेज दाखिल, प्रश्नपत्र लीक और चयन प्रक्रिया में हेरफेर के आरोपों की जांच
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को रायपुर की विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की। इसमें तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। अभियोजन शिकायत 99 पन्नों की है, जबकि इसके साथ करीब 3,700 पन्नों के दस्तावेज संलग्न किए गए हैं।
सात लोगों के नाम अभियोजन शिकायत में
ED की शिकायत में सोनवानी के अलावा कारोबारी श्रवण गोयल, तत्कालीन CGPSC उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर, उत्कर्ष चंद्राकर, विकास चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और चेतन बोरघरिया के नाम शामिल हैं। चेतन बोरघरिया उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD के पद पर पदस्थ थे।
यह मामले में ED की पहली अभियोजन शिकायत बताई जा रही है।
प्रश्नपत्र लीक और चयन में हेरफेर का आरोप
ED के अनुसार, जांच में CGPSC की वर्ष 2020 और 2021 की परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक, चयन प्रक्रिया में हेरफेर और उससे जुड़े अवैध आर्थिक लेन-देन की बात सामने आई है।
एजेंसी का आरोप है कि टामन सिंह सोनवानी ने कुछ सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक कराने तथा चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश रची। ED के मुताबिक, कुछ अभ्यर्थियों से पैसे लेकर परीक्षा में लाभ पहुंचाने के दावे भी जांच का हिस्सा हैं।
पैसे के लेन-देन की भी जांच
ED की जांच मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू पर केंद्रित है। एजेंसी के अनुसार, श्रवण गोयल ने सोनवानी से जुड़े ग्रामीण विकास समिति (GVS) नामक NGO को कथित तौर पर धन दिया था। ED का आरोप है कि यह लेन-देन उनके बेटे और बहू के CGPSC चयन में मदद से संबंधित व्यवस्था का हिस्सा था।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि उत्कर्ष और विकास चंद्राकर ने कुछ अभ्यर्थियों के लिए प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र हासिल किए तथा इसके बदले रकम जुटाई।
भर्ती नियमों में बदलाव भी जांच के दायरे में
ED के अनुसार, वर्ष 2021 में CGPSC के भर्ती नियमों में हुए बदलाव भी जांच का हिस्सा हैं। एजेंसी का आरोप है कि तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर की भूमिका उस बदलाव में रही, जिसमें ‘परिवार’ की परिभाषा से ‘nephew’ शब्द हटाया गया। ED के मुताबिक, इससे तत्कालीन अध्यक्ष सोनवानी के रिश्तेदारों के चयन का रास्ता आसान हुआ।
इन आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होना है।
CBI और EOW मामले से जुड़ी है ED की जांच
मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच छत्तीसगढ़ EOW द्वारा दर्ज FIR, जुलाई 2024 में CBI की ओर से दर्ज की गई शिकायत और वर्ष 2025 में दाखिल आरोपपत्रों के बाद आगे बढ़ी। CGPSC की वर्ष 2020 और 2021 की परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर पहले से जांच चल रही है।
ED ने जुलाई 2026 में तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को भी PMLA के तहत गिरफ्तार किया था। इसके बाद सितंबर में उत्कर्ष चंद्राकर और चेतन बोरघरिया के खिलाफ भी कार्रवाई हुई।
3700 पन्नों के दस्तावेजों में जांच से जुड़े रिकॉर्ड
विशेष PMLA अदालत में दाखिल 99 पन्नों की अभियोजन शिकायत के साथ लगभग 3,700 पन्नों के सहायक दस्तावेज लगाए गए हैं। ED ने अपनी जांच में डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग लेन-देन और अन्य रिकॉर्ड को भी आधार बनाया है।
मामले में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। आरोपियों की दोषसिद्धि का निर्धारण अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।






