चक्रधर समारोह में सितार के सुरों से सजा मंच, डॉ. लवली शर्मा की प्रस्तुति ने बांधा समां

शास्त्रीय संगीत की गहराई और मधुर सुरों से दर्शक हुए मंत्रमुग्ध, तालियों से कलाकार का किया उत्साहवर्धन
रायगढ़। 41वें अंतरराष्ट्रीय चक्रधर समारोह की संगीत संध्या में प्रसिद्ध सितार वादक डॉ. लवली शर्मा ने अपनी मनोहारी प्रस्तुति से श्रोताओं को शास्त्रीय संगीत की सुरमयी दुनिया से रूबरू कराया। सितार से निकले मधुर सुरों और रागों की गहराई ने समारोह स्थल के वातावरण को संगीतमय बना दिया। प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकार का उत्साह बढ़ाया।
15 वर्ष की उम्र से शुरू हुआ संगीत का सफर
उत्तर प्रदेश में जन्मीं डॉ. लवली शर्मा का संगीत से जुड़ाव किशोरावस्था में ही शुरू हो गया था। उन्होंने महज 15 वर्ष की आयु में वीणा चंद्रा से सितार वादन की प्रारंभिक शिक्षा ली। इसके बाद उन्होंने विभिन्न गुरुओं से संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त किया और आगे चलकर प्रसिद्ध गिटार वादक पंडित बृज भूषण काबरा की शिष्या बनीं।
गोल्ड मेडल के साथ हासिल की संगीत में उच्च शिक्षा
डॉ. लवली शर्मा ने आगरा विश्वविद्यालय से संगीत विषय में एमए की पढ़ाई गोल्ड मेडल के साथ पूरी की। इसके बाद उन्होंने बड़ौदा विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि हासिल की। संगीत के क्षेत्र में उन्होंने डी.लिट् की उपाधि भी प्राप्त की है।
देश-विदेश में प्रस्तुत कर चुकी हैं कला
डॉ. लवली शर्मा ने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर सितार वादन की प्रस्तुतियां दी हैं। वे ऑल इंडिया रेडियो तथा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की सूचीबद्ध सितार वादक हैं। संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें ‘कला भूषण’ सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।
दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर
वर्तमान में डॉ. लवली शर्मा आगरा स्थित दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में सितार की प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दे रही हैं। चक्रधर समारोह में उनकी प्रस्तुति ने शास्त्रीय संगीत प्रेमियों को विशेष रूप से प्रभावित किया और समारोह की सांगीतिक गरिमा को और समृद्ध किया।






